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पहला बच्चा आसानी से हुआ, तो दूसरी बार प्रेग्नेंसी में दिक्कत क्यों आती है

पहली गर्भधारणा के बाद दूसरी में अड़चन क्यों आती है, इस पर पुणे की फर्टिलिटी स्पेशालिस्ट डॉ. रश्मी निफाडकर ने कारण बताए।

पहला बच्चा आसानी से हुआ, तो दूसरी बार प्रेग्नेंसी में दिक्कत क्यों आती है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कई महिलाओं को पहली बार गर्भधारणा बहुत जल्दी हो जाती है, लेकिन दूसरी बार वही महिलाएं परेशान हो जाती हैं। उनके मन में सवाल उठता है कि पहली बार तो फौरन हो गया था, अब क्यों नहीं हो रहा। इसी सवाल का जवाब बाणेर, पुणे के नोवा आयव्हीएफ फर्टिलिटी की फर्टिलिटी स्पेशालिस्ट डॉ. रश्मी निफाडकर ने दिया है।

डॉ. निफाडकर ने साफ बताया कि पहले बच्चे और दूसरे बच्चे के बीच अक्सर कुछ साल का फासला होता है। इस दौरान महिला की उम्र बढ़ जाती है। उम्र बढ़ने के साथ स्त्रीबीजों की संख्या और उनकी क्वालिटी कम होने लगती है। इसलिए गर्भधारणा में पहले से ज्यादा वक्त लग सकता है।

एक मिसाल से बात और साफ होती है। जिस महिला को 27 साल की उम्र में आसानी से गर्भधारणा हो गई थी, उसे कुछ साल बाद, जैसे 34 या 36 साल की उम्र में, दोबारा गर्भधारणा में दिक्कत आ सकती है। यानी पहली बार आसानी से हुआ, इसका मतलब यह नहीं कि दूसरी बार भी वैसा ही होगा।

पहले बच्चे के बाद महिला का वजन बढ़ सकता है। थायरॉईड, मधुमेह, पीसीओएस या दूसरे हार्मोन्स की समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं। इनसे मासिक धर्म अनियमित हो सकता है और अंडा बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। इस वजह से भी गर्भधारणा में देर हो सकती है।

सिर्फ महिला की सेहत ही मायने नहीं रखती, पुरुष की सेहत का भी इस पर असर पड़ता है। बढ़ती उम्र, वजन बढ़ना, धूम्रपान, शराब, टेंशन या कुछ बीमारियों से शुक्राणुओं की संख्या और क्वालिटी घट सकती है। इसलिए गर्भधारणा न हो रही हो, तो महिला और पुरुष दोनों की जांच करवाना जरूरी है।

दूसरी बार दिक्कत आने पर पहली गर्भधारणा और प्रसूति का इतिहास भी देखा जाता है। प्रसूति के दौरान कोई परेशानी आई थी या नहीं, उसके बाद कोई बीमारी हुई या ऑपरेशन हुआ या नहीं, यह जानकारी भी अहम होती है।

जरूरत के हिसाब से यह जांचा जा सकता है कि मासिक धर्म नियमित है या नहीं, अंडा बन रहा है या नहीं, स्त्रीबीजों का स्टॉक कितना है, और गर्भाशय व गर्भनलिकाओं की हालत कैसी है। पुरुषों के वीर्य की क्वालिटी भी देखी जाती है। फर्टिलिटी जांच का मतलब यह नहीं कि फौरन आयव्हीएफ करना पड़ेगा। ये जांचें इसलिए होती हैं कि पता चले दिक्कत ठीक कहां है।

इसलिए अगर काफी वक्त से कोशिश के बाद भी गर्भधारणा नहीं हो रही, मासिक धर्म अनियमित है या महिला की उम्र ज्यादा हो चुकी है, तो सही वक्त पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। दूसरी बार गर्भधारणा में वक्त लग रहा है, इसका यह मतलब नहीं कि गर्भधारणा होगी ही नहीं।

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