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नवरस से इमोशन AI तक: एल सी सिंह की भावनाओं को समझने वाली तकनीक

नवरस से इमोशन AI तक: एल सी सिंह की भावनाओं को समझने वाली तकनीक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

निहिलेंट के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन एल सी सिंह अब AI, भारतीय सौंदर्यशास्त्र और अपनी किताबों के जरिए भावनात्मक जागरूकता पर काम कर रहे हैं।

पुणे, 30 अक्टूबर 2026: एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी में दशकों काम करने के बाद निहिलेंट के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन एल सी सिंह (LC Singh) अब भावनात्मक जागरूकता की तरफ बढ़ रहे हैं। इसमें वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय सौंदर्य-चिंतन और इंसानी अनुभव को आकार देने वाली ताकतों में अपनी पुरानी दिलचस्पी को साथ ला रहे हैं।

टेक्नोलॉजी ने हमारे आसपास की लगभग हर चीज़ को नापना सिखा दिया है। सिंह चाहते हैं कि यही नजर अब इंसान के भीतर भी जाए। nSEPIA के प्राइवेट बीटा की जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा, "Technology has measured almost everything around us, but very little within us. nSEPIA is a step toward changing that." उनकी ताज़ा कोशिश का मकसद AI की मदद से लोगों को अपनी भावनात्मक स्थिति पहचानने और उस पर सोचने में मदद देना है।

निहिलेंट लिमिटेड का Emoscape एक इमोशन-एनालिसिस प्लेटफॉर्म है और nSEPIA कंज्यूमर के लिए इमोशनल-वेलनेस ऐप है। दोनों AI के रास्ते से यही सवाल उठाते हैं कि इंसान खुद को कैसे समझता है। सिंह की किताबें Things We Don't See और The Collapse of Illusions इसी सवाल को निजी इतिहास और दार्शनिक पड़ताल के जरिए देखती हैं।

सिंह की यात्रा गंगा के मैदानों के गांव भटौली से शुरू होती है। The Collapse of Illusions की शुरुआत पर छपे एक लेख में उन्होंने याद किया कि बचपन में तारों को देखते हुए उनके मन में अस्तित्व को लेकर सवाल उठे थे। ये सवाल अलग-अलग देशों, पेशेवर भूमिकाओं, कामयाबी और नुकसान के बीच भी उनके साथ रहे।

उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से 1970 में ग्रेजुएशन किया। कंपनी रिकॉर्ड में उनकी केमिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल का एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा करना भी दर्ज है।

उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में 17 साल काम किया और 1998 में सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट के तौर पर वहां से निकले। उस दौर की रिपोर्टिंग में उन्हें कंपनी का सॉफ्टवेयर-प्रोडक्ट्स कारोबार खड़ा करने और अंतरराष्ट्रीय विस्तार में मदद करने का श्रेय दिया गया। इसके बाद वे इंटरनेशनल कंप्यूटर्स इंडिया लिमिटेड के प्रेसिडेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव बने, जिसका नाम 1999 में ज़ेन्सार टेक्नोलॉजीज़ हुआ। वहां ग्लोबल ऑपरेशंस संभालने के बाद उन्होंने 2000 में निहिलेंट की स्थापना की।

2019 के एक इंटरव्यू में सिंह ने बताया कि TCS के साल ऑपरेशंस, मार्केटिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस और नए बाजारों में उद्यमी तरीके से काम करने का मौका थे। निहिलेंट बनाने की वजह उन्होंने यह बताई कि वे डिजाइन थिंकिंग के जरिए टेक्नोलॉजी उद्योग में अलग योगदान देना चाहते थे। उन्होंने Banaras: A Mystic Love Story की पटकथा लिखी और उसे प्रोड्यूस भी किया।

निहिलेंट ने 14 अप्रैल 2025 को Emoscape का ऐलान किया। यह एक AI इंजन है, जो नवरस, यानी भारतीय प्रदर्शन-सिद्धांत और नाट्यशास्त्र से जुड़ी नौ रसों की परंपरा, से प्रेरित है। कंपनी ने इसे हेल्थकेयर, शिक्षा, खेल, मार्केटिंग और कार्यस्थल की भलाई जैसे पेशेवर माहौल के लिए रखा है। घोषणा में सिंह ने कहा, "At Nihilent, we have always believed that technology should serve a higher human purpose."

Emoscape के तकनीकी ब्योरे के मुताबिक प्लेटफॉर्म चेहरे, सिर और ऊपरी शरीर के बारीक पैटर्न देखता है, जिनमें फेशियल-लैंडमार्क की हलचल, आंखों के आसपास के संकेत और सिर की हरकत शामिल हैं। वेबकैम के जरिए होने वाली बातचीत से कंपनी जिसे इमोशनल-स्टेट असेसमेंट कहती है, वह तैयार होता है। कैमरा सिर्फ हलचल दर्ज करता है और सिस्टम अपने मॉडलों से उसका मतलब निकालता है।

मई 2026 में निहिलेंट ने बताया कि उसके इमोशन-डिटेक्शन फ्रेमवर्क को साउथ अफ्रीकन पेटेंट ऑफिस से पेटेंट मिला है। कंपनी के मुताबिक यह फ्रेमवर्क नवरस के सिद्धांतों, क्लिनिकल जानकारी और अपने AI व मशीन-लर्निंग मॉडलों को मिलाता है। पेटेंट की घोषणा में सिंह ने कहा, "Emotion sits deeper than expression, it shapes how we perceive, decide, and act."

nSEPIA इसी तकनीक को निजी ऐप में लाता है। निहिलेंट ने इसका ग्लोबल लॉन्च 27 अगस्त 2026 को घोषित किया। इसमें यूज़र अपनी भावनात्मक स्थिति का आकलन करता है, सुझाई गई गतिविधि करता है और फिर देखता है कि कुछ बदला या नहीं। ऐप की वेबसाइट के मुताबिक 30 सेकंड का स्कैन आकलन को ORB नाम की विजुअल तस्वीर में बदलता है, साथ में भावनात्मक इनसाइट और संतुलन बताने वाला "Emometer" होता है। ये कंपनी के अपने दावे हैं, सटीकता पर कोई स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं।

सुझावों में संगीत, मेडिटेशन, ब्रेथवर्क और योग शामिल हैं। संगीत में भारतीय शास्त्रीय राग, पश्चिमी सिम्फनी और खास तौर पर बनाई गई रचनाएं हैं। निहिलेंट का कहना है कि भावनात्मक आकलन यूज़र के अपने डिवाइस पर प्रोसेस होता है, ताकि निजता बनी रहे। लॉन्च पर सिंह ने कहा, "Technology, in this sense, is not replacing human understanding; it is helping us become more aware of ourselves."

अगस्त 2026 की एक घोषणा में बताया गया कि फिटनेस ब्रांड Urbounce अपने मेंबर्स के अनुभव में Emoscape जोड़ रहा है और पुणे के कई सेंटरों में इसे शुरू किया जाएगा। मकसद शारीरिक फिटनेस के पैमानों के साथ भावनात्मक स्थिति को भी देखना है, जिसमें पेशेवर व्याख्या और सही मार्गदर्शन शामिल है। इससे यह साबित नहीं होता कि भावनात्मक आकलन से फिटनेस, रिकवरी या भलाई बेहतर होती है।

सितंबर 2026 के एक इंटरव्यू में Emoscape के बिजनेस डायरेक्टर संदीप पेंडुरकर ने बड़े क्लिनिकल अध्ययन, ज्यादा विविध मरीज समूहों और लंबे समय के शोध की योजना बताई।

इमोशन AI ऐसे क्षेत्र में काम करता है, जहां बाहरी हलचल और भीतरी अनुभव का रिश्ता अब भी विवादित है। मनोवैज्ञानिक लिसा फेल्डमैन बैरेट की अगुवाई में 2019 की एक बड़ी समीक्षा में पाया गया कि चेहरे की हरकतें स्थितियों, लोगों और संस्कृतियों के बीच काफी बदलती हैं। समीक्षा का निष्कर्ष था कि वे भावनात्मक स्थिति का पक्का संकेत मानने लायक भरोसेमंद नहीं हैं। दूसरे शोधकर्ताओं ने भावनाओं की व्यापक पहचान के पक्ष में सबूत रखे हैं, पर वे चेहरे, शरीर और संदर्भ की जानकारी वाली ज्यादा बारीक प्रक्रियाओं की बात भी करते हैं। उत्पाद के दावों के लिए उसी उत्पाद का सबूत चाहिए।

निहिलेंट की मई की पेटेंट घोषणा में क्लिनिकल और अकादमिक काम का जिक्र था, जिसमें एक वैलिडेशन मैनुस्क्रिप्ट तब समीक्षा में थी। इसे पूरी हो चुकी प्रकाशित स्टडी नहीं माना जा सकता।

सिंह की तकनीकी कोशिशों का निजी पहलू Things We Don't See है। 25 मार्च 2026 को मुंबई में लॉन्च हुआ यह संस्मरण ऐसी जिंदगी को देखता है, जो सिर्फ पेशेवर कामयाबी से नहीं, अनिश्चितता, रिश्तों, झटकों और अर्थ की खोज से भी बनी। लॉन्च पर सिंह ने कहा, "I did not write this book simply to recount my journey. I wrote it to understand it better."

The Collapse of Illusions पहचान, डर, याददाश्त, अपनेपन और निश्चितता की चाह को टटोलती है। इसमें EchoTime और EchoSpace जैसी अवधारणाएं आती हैं। अपनी वेबसाइट पर सिंह EchoTime को अनुभव की भावनात्मक अवधि सोचने का तरीका बताते हैं, यानी एक घटना खत्म होने के बाद भी क्यों टिकी रहती है और दूसरी बिना असर के गुजर जाती है। इसे चिंतन की अवधारणा के तौर पर पेश किया गया है, क्लिनिकल माप के तौर पर नहीं।

आगे की परीक्षा व्यावहारिक भी है और वैज्ञानिक भी: आकलन भरोसेमंद हों, उनकी सीमाएं साफ बताई जाएं और यूज़र को उन पर अमल करके कुछ सचमुच मिले।

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