पुणे के कारोबारी पेमेंट पर नज़र रखने के लिए AI से CCTV फुटेज की जांच आज़मा रहे हैं
पुणे के रेस्टोरेंट और खाने-पीने की दुकानों के मालिक सुरक्षा और पेमेंट की गारंटी के लिए AI और CCTV सेवाओं को साथ जोड़ रहे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे, 24 अक्टूबर 2026: त्योहारों के जुलूसों और रैलियों में भीड़ के बीच संदिग्ध लोगों को पहचानने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने AI तकनीक लगाई है। इसके बाद अब पुणे के आम लोग और कारोबारी भी इसी राह पर चल पड़े हैं। रेस्टोरेंट और खाने-पीने की दुकानों में सुरक्षा और पेमेंट की गारंटी पक्की करने के लिए वे AI और CCTV सेवाओं को साथ जोड़ रहे हैं।
पार्वती पायथा के एक कारोबारी से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया, "हम CCTV फुटेज ChatGPT पर अपलोड करते हैं, उस आदमी को ढूंढते हैं जिस पर शक है कि उसने पैसे नहीं दिए, और उसकी एक साफ़ तस्वीर बना लेते हैं, डिफॉल्टर के तौर पर।"
कारोबारियों को AI एक आने वाला नया सुरक्षा उपाय लगता है और इसमें उन्हें उम्मीद दिखती है, क्योंकि इससे वे अपने धंधे का खर्च बढ़ाए बिना नए तरीके आज़मा सकते हैं।
एक और रेस्टोरेंट मालिक ने कहा, "हमें अभी तक इसे ठीक से आज़माने का मौका नहीं मिला, क्योंकि हमारे ग्राहक अच्छे और ईमानदार लोग हैं। लेकिन भीड़ के वक्त यह देखने में मदद मिलती है कि किसने पैसे दिए और किसने नहीं।"
दूसरी तरफ़ CCTV फुटेज के इस इस्तेमाल से ग्राहकों की प्राइवेसी और उनके निजी डेटा को संभालने पर सवाल भी उठते हैं। भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 लागू हैं, जो डिजिटल निजी डेटा की प्रोसेसिंग और उसकी सुरक्षा का ढांचा तय करते हैं।
पुणे के कारोबारी अपने रोज़ के कामकाज में AI के इस्तेमाल को परख रहे हैं। रेस्टोरेंट के इंतज़ाम, ग्राहकों पर नज़र और पेमेंट का हिसाब रखने की बातचीत में यह तकनीक धीरे-धीरे शामिल हो रही है। यानी इसका इस्तेमाल पुराने सिक्योरिटी सिस्टम से आगे निकलकर नई जगहों तक पहुंच रहा है।
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