महाराष्ट्र में नौ महीने में सड़क हादसों में 11,326 मौतें, 26,915 हादसे दर्ज
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हाईवे ट्रैफिक पुलिस के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर 2026 के बीच राज्य में सड़क हादसों में 11,326 लोगों की जान गई। पिछले साल से मौतें 586 कम हैं, फिर भी संख्या गंभीर है।
महाराष्ट्र में सड़क हादसों की भयावहता दिन-ब-दिन चिंता बढ़ा रही है। साल 2026 के जनवरी से सितंबर, यानी सिर्फ नौ महीनों में राज्य के 11,326 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवा दी। यह बात महाराष्ट्र हाईवे ट्रैफिक पुलिस के रोड विभाग के ताज़ा जारी आंकड़ों से सामने आई है।
हाईवे ट्रैफिक पुलिस की दी हुई जानकारी के मुताबिक 2025 के जनवरी से सितंबर के बीच राज्य में सड़क हादसों में 11,912 लोगों की मौत हुई थी। इस साल उसी अवधि में यह आंकड़ा 11,326 दर्ज किया गया है। यानी पिछले साल के मुकाबले मौतें 586 कम हुई हैं। लेकिन नौ महीने में 11 हजार से ज्यादा लोगों का हादसों में मर जाना बहुत गंभीर और चिंताजनक बात है।
आंकड़ों के हिसाब से जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान महाराष्ट्र में कुल 26,915 सड़क हादसे दर्ज हुए। इनमें से 10,444 हादसे जानलेवा साबित हुए। हाईवे पुलिस के विश्लेषण में हादसे बढ़ने की वजहें गिनाई गई हैं: तेज रफ्तार यानी स्पीडिंग, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, और सड़कों पर खतरनाक व असुरक्षित हालात।
राज्य की राजधानी मुंबई में भी हालात ठीक नहीं हैं। इन नौ महीनों में शहर में 248 जानलेवा हादसे दर्ज हुए, जिनमें 260 लोगों की मौत हुई। इसलिए मुंबई में ट्रैफिक कंट्रोल, बुनियादी सुविधाओं और सड़क सुरक्षा के उपायों पर और गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत खड़ी हो गई है।
इस भयावह स्थिति को रोकने के लिए हाईवे पुलिस ने कुछ अहम उपाय सुझाए हैं। खतरनाक सड़कों पर सुरक्षा रेलिंग लगाना, सही सूचना बोर्ड लगाना, ब्लैक स्पॉट यानी हादसों की आशंका वाली जगहों को सुधारना, और स्कूलों के आसपास स्पीड लिमिट तय करके उसका सख्ती से पालन करवाना ज़रूरी बताया गया है।
इसके अलावा हादसे के बाद घायलों को फौरन मेडिकल मदद मिलना, यानी गोल्डन आवर में इलाज, बहुत ज़रूरी है। प्रशासन के उपायों के साथ-साथ अगर वाहन चलाने वाले भी जिम्मेदारी से गाड़ी चलाएं, तो इस जनहानि को टाला जा सकता है।
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