महंगाई की मार: दिवाली पर पुणे के बाजारों में बिक्री 30 फीसदी तक घटी, व्यापारी परेशान
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बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया की जंग की अनिश्चितता और तंग घरेलू बजट के चलते पुणे के व्यापारियों का कहना है कि इस दिवाली बिक्री पिछले साल से 30 फीसदी तक कम है।
इस साल की दिवाली पिछले साल जितनी चमकदार नहीं है। महंगाई ने लोगों की खरीदने की ताकत पर असर डाला है। त्योहार का जोश तो बरकरार है, लेकिन पुणे के बाजारों में मांग कमजोर है। व्यापारियों के मुताबिक बिक्री 30 फीसदी तक गिर गई है। बढ़ते दाम, पश्चिम एशिया की जंग को लेकर अनिश्चितता और घर के तंग बजट की वजह से ग्राहक खर्च पर लगाम लगा रहे हैं।
एक हालिया सर्वे के अनुसार त्योहारी खर्च में 6 फीसदी की गिरावट का अंदाजा है। यह 2025 के 2.2 लाख करोड़ रुपये से घटकर इस साल 1.97 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। एक परिवार का औसत खर्च करीब 20,000 रुपये ही रहने की उम्मीद है। करीब 85 फीसदी परिवार खरीदारी के लिए अपनी बचत में हाथ डालेंगे।
लक्ष्मी पूजन में बस एक दिन बाकी है और आखिरी वक्त की खरीदारी करने वालों से बाजार भरे हुए हैं। फिर भी व्यापारी बताते हैं कि ग्राहक अलग-अलग दुकानों पर दाम मिला रहे हैं, कम मात्रा में सामान ले रहे हैं और बड़ी खरीद आगे के लिए टाल रहे हैं।
सबसे बड़ी वजह रोजमर्रा और त्योहार की जरूरी चीजों का महंगा होना है। बताया गया है कि घरेलू उपकरणों के दाम 4 से 7 फीसदी और मिठाइयों के 16 फीसदी बढ़े हैं। दिवाली के तोहफों में अहम मेवे और भी महंगे हुए हैं। बादाम 34 फीसदी चढ़ा है और पिस्ता लगभग दोगुना हो गया है। सर्वे के मुताबिक 30 फीसदी से ज्यादा परिवार गैर-जरूरी खरीदारी पूरी तरह टाल देंगे।
मिठाई की दुकान चलाने वाले कांतिलाल के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले बिक्री 25 से 30 फीसदी कम है, खासकर मेवों के दाम बढ़ने से। उन्होंने कहा, "दाम 30 से 40 फीसदी बढ़ गए हैं। बादाम पिछले साल 800 रुपये किलो था, अब 1,200 रुपये में बिक रहा है। पिस्ता 2025 में करीब 1,000 रुपये किलो था, इस साल 2,200 रुपये हो गया है, यानी 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़त। ग्राहक सबसे अच्छा सौदा ढूंढने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान घूम रहे हैं।"
कपड़ा दुकानदार हसन राजपूतवाला ने बताया कि ऊंची महंगाई और कच्चे तेल के बढ़ते दाम से मांग काफी घटी है। अलग-अलग रंगों में रंगे जाने वाले ग्रे कपड़े का दाम करीब 20 फीसदी बढ़ा है। उनके शब्दों में, "पहले हम इसे 70 रुपये मीटर में खरीदते थे, अब यह 100 रुपये हो गया है। इसका कारोबार पर असर पड़ा है। वरना दुकान ग्राहकों से भरी होती।" उन्होंने यह भी कहा कि खरीदारी की आदत बदल रही है। पहले लोग दिवाली से कम से कम एक महीना पहले कपड़ा लेकर दर्जी से सिलवाते थे, पर इस साल रेडीमेड कपड़ों की दुकानों की ओर रुझान बढ़ा है।
लक्ष्मी रोड पर सोने के गहनों की एक दुकान की सेल्सपर्सन अंजलि काकडे के अनुसार सोने की बिक्री 20 से 30 फीसदी तक तेजी से गिरी है, जबकि सोने के दाम भी थोड़े चढ़े हैं।
पुणे रेलवे स्टेशन के पास दोपहिया शोरूम के मैनेजर अनूप टेंडवानी ने बताया कि बिक्री पिछले साल से कम है। पिछले साल दशहरा और दिवाली एक ही महीने में पड़े थे, जिससे बिक्री को सहारा मिला। इस साल दोनों त्योहारों के बीच फासला है। पेट्रोल और दोपहिया गाड़ियों के दाम भी करीब 6 से 7 फीसदी बढ़े हैं।
स्टेशन के पास ही उपकरणों के शोरूम के मैनेजर प्रसाद श्रीगोद ने कहा कि रकम के हिसाब से बिक्री पिछले साल के बराबर है, मगर बिके हुए सामान की संख्या घटी है। उन्होंने इसकी वजह पश्चिम एशिया की जंग से पैदा हुई अनिश्चितता और घबराहट को बताया। उनके मुताबिक एसी के दाम बढ़ने से आमदनी का स्तर बना रहा। फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन के दाम लगभग पिछले साल जैसे हैं। एलईडी टीवी में सोनी ने दाम बढ़ाए हैं और एलजी ने थोड़े घटाए हैं। आईफ़ोन की शुरुआती कीमत करीब 1 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 1.63 लाख रुपये हो गई है।
सर्वे के मुताबिक कपड़े और फैशन सबसे पसंदीदा हैं, जिनमें 71 फीसदी लोगों की दिलचस्पी है। इसके बाद सफर में 46 फीसदी और घरेलू उपकरणों में 44 फीसदी परिवार खर्च करना चाहते हैं। घूमने-फिरने पर दिवाली का खर्च 60 फीसदी बढ़ा है और एक त्योहारी ट्रिप का औसत खर्च करीब 55,000 रुपये हो गया है, जो 2024 में 35,000 रुपये था।
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