बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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जव्हार PWD में फर्जी FDR का शक, 172 करोड़ के घोटाले की आशंका, FIR अब तक नहीं

जव्हार PWD में फर्जी FDR का शक, 172 करोड़ के घोटाले की आशंका, FIR अब तक नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

जव्हार के सार्वजनिक निर्माण विभाग में ठेकेदार की जमा की गई स्टेट बैंक की FDR फर्जी निकलीं। मामला 172 करोड़ रुपये तक का हो सकता है, पर FIR दर्ज नहीं हुई।

जव्हार के सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों (FDR) का मामला सामने आया है। गड़बड़ी पकड़ में आई नंबरों से। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की FDR पर 11 अंक होते हैं, जबकि एक ठेकेदार की जमा की हुई रसीदों पर सिर्फ सात अंक थे। कुछ ही घंटों बाद एक आदमी लंच ब्रेक के दौरान PWD दफ्तर में घुसा, मेज पर पड़ी रसीदों का एक बंडल उठाया और चला गया। यह सब CCTV में दर्ज हो गया। इसके बाद कई हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन FIR अब तक दर्ज नहीं हुई है। विभाग में चर्चा है कि अफसर जिम्मेदार लोगों पर केस करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

पहले समझ लें कि यह खेल कैसे चलता है। सरकार जब ठेकेदारों से काम करवाती है तो टेंडर निकालती है। जो ठेकेदार टेंडर के लिए योग्य होते हैं, उन्हें काम मिलने से पहले सिक्योरिटी डिपॉजिट और FDR जमा करनी पड़ती हैं। इन रसीदों के पीछे या तो बैंक में सचमुच जमा रकम होनी चाहिए या उसके बदले गिरवी रखी संपत्ति। जव्हार में SBI के अधिकारियों ने पाया कि विकास कामों के लिए एक ठेकेदार की जमा की हुई FDR फर्जी हैं। बैंक ने यह बात जव्हार के कार्यकारी इंजीनियर के दफ्तर को बताई। इस मामले से लगता है कि कोई ठेकेदार बैंक की नकली रसीदें छपवाकर, एक पैसा जमा किए बिना, विभाग को थमा सकता है।

बैंक ने जब गड़बड़ी की तरफ इशारा किया तो PWD दफ्तर में हड़कंप मच गया। उसी दोपहर स्टाफ लंच पर गया था और एक आदमी दफ्तर में आया। उसने मेज पर रखी रसीदें उठाईं और निकल गया। पूरी घटना CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई। विभाग के कर्मचारियों में यह बात हो रही है कि कहीं ठेकेदार के आदमी ने रसीदें इसलिए तो नहीं उठाईं कि वे जाली थीं। जव्हार पुलिस स्टेशन में शिकायत दी गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिस पर कई लोग हैरान हैं।

फिर दशहरे के दिन एक नया मोड़ आया। एक अनजान शख्स ने जव्हार PWD दफ्तर में 73 लाख रुपये की नई FDR जमा कर दीं। विभाग का कहना है कि ये किसी दूसरे ठेकेदार की हो सकती हैं। उसने जव्हार पुलिस को लिखकर बताया है कि इन रसीदों का चोरी हुई रसीदों से कोई संबंध नहीं है।

अलग-अलग कामों के लिए जमा की गई फर्जी FDR का आंकड़ा कम से कम 172 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। अभी इसी अनुमान पर बात हो रही है। इसका एक हिस्सा पहले ही सामने आ चुका है। वाडा के एक ठेकेदार से जुड़ा 3,47,56,506 रुपये का FDR घोटाला है, जो सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा बताया गया है। SBI के नाम पर करोड़ों की नकली रसीदें छपने और सरकार के साथ धोखाधड़ी होने के बाद विशेष जांच दल (SIT) बनाने की मांग उठी है।

जव्हार PWD के प्रभारी कार्यकारी इंजीनियर संजय डोंगरे ने बताया कि ठेकेदार के अलग-अलग कामों के लिए करीब 3.48 करोड़ रुपये की FDR जमा की गई थीं। उनके मुताबिक चोरी हुई FDR की कीमत फिलहाल करीब 73 लाख रुपये है। डोंगरे ने माना कि दशहरे पर एक आदमी लिफाफे में रसीदें दे गया था। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज की जांच हो रही है, पूरी जानकारी जव्हार पुलिस को दे दी गई है और PWD केस दर्ज करवाने की "कोशिश" कर रहा है।

सवाल यह है कि विभाग "कोशिश" कर रहा है, जबकि तथ्य सामने हैं: बैंक की चेतावनी, CCTV रिकॉर्डिंग और इंजीनियर की अपनी पुष्टि। यहां के लोग पूछ रहे हैं कि फिर FIR का इंतजार क्यों हो रहा है।

जव्हार PWD डिवीजन में जव्हार, तलासरी, मोखाडा और वाडा का कुछ हिस्सा आता है। यह इलाका बड़े पैमाने पर आदिवासी है और यहां जिला परिषद और आदिवासी विकास विभाग के जरिए बहुत सारी योजनाएं चलती हैं। बताया गया है कि इस वजह से पहले भी कई बार काम सिर्फ कागज पर दिखाया गया और एक ही काम के बिल तीन-चार बार निकाले गए। कहा जाता है कि इसीलिए आदिवासी इलाका होने के बावजूद अफसर यहां पोस्टिंग के लिए जोर लगाते हैं। आरोप है कि कुछ अफसर इतने बेधड़क थे कि सस्पेंड होने की भी परवाह नहीं करते थे, बस जाने से पहले करोड़ों जेब में आ जाएं। आरोप है कि उन्होंने रिश्वत लेकर फर्जी टेंडर पास किए।

अब सबकी नजर लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे उर्फ बाबाराजे भोसले पर है। मंत्री की पूरे राज्य में साफ-सुथरी छवि के लिए पहचान है। इलाके के लोग मांग कर रहे हैं कि घोटाला खुलने के बाद सख्त और तुरंत कार्रवाई हो। नाराज लोग चाहते हैं कि इसमें शामिल सभी निजी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और उन्हें बचाने के आरोपी PWD अफसरों को फौरन सस्पेंड किया जाए। इस स्थिति से विभाग के शीर्ष नेतृत्व पर जवाबदेही निभाने का भारी दबाव बन गया है। जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जनता पूछती रहेगी कि भरोसा सच्चा है या सिर्फ दिखावा।

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