शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

बुलढाणा में तुअर पर फली छेदक इल्ली का खतरा, कृषि विभाग ने किसानों को किया आगाह

बुलढाणा में तुअर पर फली छेदक इल्ली का खतरा, कृषि विभाग ने किसानों को किया आगाह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

बादल, सूखी हवा और रात की ठंड से तुअर की फसल पर कीड़ों का हमला बढ़ने की आशंका है। कृषि विभाग ने फूल अवस्था की फसल बचाने के उपाय बताए हैं।

बुलढाणा में बादल वाला मौसम, सूखी हवा और रात की ठंड की वजह से तुअर की फसल पर फली छेदक यानी फली में छेद करने वाली इल्ली का प्रकोप बढ़ने की आशंका बन गई है। अभी तुअर की फसल फूल अवस्था में है, इसलिए कीड़ों का हमला हुआ तो पैदावार पर असर पड़ सकता है। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे फसल की नियमित जांच करें और एकीकृत कीट प्रबंधन के उपाय अपनाएं, ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके।

तुअर पर मुख्य रूप से तीन कीड़ों का प्रकोप दिखता है: फली छेदक इल्ली (हेलिकोवर्पा), पिच्छ पतंगा और फली मक्खी। फली छेदक इल्ली की मादा पतंगा कलियों, फूलों और फलियों पर अंडे देती है। अंडों से निकली इल्लियां शुरू में कलियां और फूल खाती हैं। आगे चलकर वे फलियों में छेद करके अंदर के दाने खा जाती हैं। पिच्छ पतंगे की इल्ली फलियों का छिलका खुरचकर दानों को नुकसान पहुंचाती है, जबकि फली मक्खी की इल्ली फली के अंदर रहकर दाने कुतरती है। इससे दानों की क्वालिटी और पैदावार दोनों घटने की आशंका रहती है।

कीड़ों को रोकने के लिए कृषि विभाग ने प्रति हेक्टेयर 20 पक्षी अड्डे लगाने को कहा है। पक्षियों की मदद से इल्लियों पर प्राकृतिक तौर पर काबू पाने में आसानी होती है। साथ ही फली छेदक इल्ली पर नजर रखने के लिए प्रति हेक्टेयर 20 कामगंध जाल यानी फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है।

नियंत्रण के उपाय तब शुरू करने हैं जब दो से तीन दिन में एक ट्रैप में 5 से 6 पतंगे मिलें, एक पौधे पर एक इल्ली दिखे या 5 से 10 फीसदी नुकसान हो जाए। पिच्छ पतंगे के मामले में 10 पौधों में 5 पतंगे मिलना और फली मक्खी से 5 से 10 फीसदी दानों का खराब होना भी प्रकोप के अहम लक्षण हैं।

पहले छिड़काव के 15 दिन बाद कीड़ों के प्रकोप को देखते हुए दूसरा छिड़काव करना है। इसके लिए इनमें से कोई एक कीटनाशक इस्तेमाल करना है: इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 60 ग्राम प्रति एकड़, लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 5 फीसदी ईसी 200 मिली प्रति एकड़, इथियोन 50 फीसदी ईसी 500 मिली प्रति एकड़, या क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 फीसदी एससी 60 मिली प्रति एकड़।

छिड़काव से पहले प्रोडक्ट के लेबल पर लिखी हिदायतें, तुअर की फसल के लिए उसकी मंजूरी और सुझाई गई मात्रा जरूर जांच लें। एक बार में एक ही विकल्प इस्तेमाल करें। छिड़काव करते वक्त अपनी हिफाजत के साधन पहनें और ध्यान रखें कि मधुमक्खियों व दूसरे फायदेमंद कीड़ों को नुकसान न पहुंचे। कृषि विभाग ने साफ किया है कि फसल की नियमित जांच और वक्त पर सही कदम उठाने से संभावित नुकसान टाला जा सकता है।

#पुणे#PT24#Pune

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे