1 नवंबर से सात हवाई अड्डों पर शुरू होगा डिजी यात्रा का इंटरनेशनल ट्रायल
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ई-पासपोर्ट वाले पात्र भारतीय यात्री एयर इंडिया और इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर सकेंगे। ट्रायल दिसंबर 2026 तक चलेगा।
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026: डिजी यात्रा अब सिर्फ घरेलू उड़ानों तक सीमित नहीं रहेगी। 1 नवंबर से देश के सात हवाई अड्डों पर इंटरनेशनल यात्रियों के लिए इसका ट्रायल शुरू हो रहा है। इसमें ई-पासपोर्ट रखने वाले पात्र भारतीय नागरिक एयर इंडिया और इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में तय चेकपॉइंट पर डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर सकेंगे।
यह ट्रायल दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर के हवाई अड्डों पर होगा। उम्मीद है कि यह दिसंबर 2026 तक चलेगा। इसमें फेशियल रिकग्निशन और पासपोर्ट पर आधारित डिजिटल क्रेडेंशियल को परखा जाएगा, ताकि हवाई अड्डे के सफर में कुछ पड़ावों पर बार-बार पहचान जांचने की जरूरत कम हो।
ट्रायल में हिस्सा लेने वाले पात्र यात्रियों को डिजी यात्रा मोबाइल ऐप के जरिए अपना डिजिटल आइडेंटिटी क्रेडेंशियल बनाना होगा। इसके लिए ई-पासपोर्ट का मशीन से पढ़ा जाने वाला हिस्सा स्कैन करना पड़ेगा। फिर ऐसे स्मार्टफोन से, जिसमें NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) की सुविधा हो, पासपोर्ट में लगी चिप पढ़ी जाएगी। इसके बाद सेल्फी ली जाएगी और जानकारी की पुष्टि होगी।
पुष्टि हो जाने पर यह डिजिटल क्रेडेंशियल यात्री के फोन में डिजी यात्रा वॉलेट में रखा जाएगा। हर हवाई अड्डे पर जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है, उसके हिसाब से इसे टर्मिनल एंट्री, सिक्योरिटी होल्ड एरिया और बोर्डिंग गेट जैसी जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
लेकिन यह डिजिटल सुविधा इंटरनेशनल सफर की मौजूदा जरूरतों की जगह नहीं लेगी। यात्रियों को पासपोर्ट और बाकी जरूरी ट्रैवल दस्तावेज साथ रखने ही होंगे। एयरलाइन की दस्तावेज जांच भी होगी, और इमिग्रेशन समेत बाकी जरूरी औपचारिकताओं से भी गुजरना होगा। शुरुआती ट्रायल हवाई अड्डे के अंदर यात्रियों की प्रोसेसिंग पर है, जबकि इमिग्रेशन और एमिग्रेशन की प्रक्रिया अलग से चलती रहेगी।
यह विस्तार घरेलू उड़ानों में डिजी यात्रा के इस्तेमाल के बाद हो रहा है, जहां चुनिंदा हवाई अड्डों पर यात्री डिजिटल पहचान और फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेशनल ट्रायल में देखा जाएगा कि ई-पासपोर्ट पर आधारित क्रेडेंशियल अलग-अलग चेकपॉइंट पर कैसे काम करते हैं। इसके बाद ही किसी बड़े पैमाने पर लागू करने पर विचार होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रायल में यात्रियों से मिले फीडबैक के आधार पर 2027 में इसे और बड़े स्तर पर फैलाने की योजना बनेगी। डिजी यात्रा अंतरराष्ट्रीय एविएशन आइडेंटिटी फ्रेमवर्क के साथ तालमेल की संभावना भी तलाश रही है। इनमें इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की One ID पहल और इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन की पब्लिक की डायरेक्टरी शामिल हैं।
इंटरनेशनल ट्रायल के साथ ही प्लेटफॉर्म ने मोबाइल ऐप का नया डिजाइन भी पेश किया है। इसमें नेविगेशन आसान किया गया है, क्रेडेंशियल वॉलेट अपडेट हुआ है और कंसेंट स्क्रीन नई बनी है, ताकि यूजर समझ सकें कि वे कौन सी जानकारी किसके साथ साझा कर रहे हैं।
ये ट्रायल हवाई अड्डों की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में एक और कदम हैं। इनका दायरा कितना बढ़ेगा, यह टेस्टिंग के नतीजों, हवाई अड्डों के इंफ्रास्ट्रक्चर और नियमों की जरूरतों पर निर्भर करेगा। साथ ही इंटरनेशनल सफर आसान बनाते हुए यात्रियों की प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी बनाए रखना भी जरूरी होगा।
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