वाढवण बंदर रद्द करने की मांग पर पालघर के वरॉर गांव में जुटे हजारों लोग
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शुक्रवार को वरॉर गांव में हजारों नागरिकों ने प्रस्तावित वाढवण बंदर के खिलाफ आंदोलन किया। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और माकपा ने समर्थन दिया।
पालघर जिले में प्रस्तावित वाढवण गहरे समुद्र के बंदरगाह के खिलाफ स्थानीय लोगों का विरोध तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को वरॉर गांव में हजारों नागरिक इकट्ठा हुए और उन्होंने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। आंदोलन में मांग की गई कि वाढवण बंदरगाह प्रोजेक्ट रद्द किया जाए।
इस आंदोलन को कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने समर्थन दिया।
वाढवण बंदरगाह डहाणू के पास प्रस्तावित है और इसे एक कृत्रिम समुद्री द्वीप पर बनाया जाना है। लेकिन स्थानीय आदिवासी, किसान और मछुआरों को डर है कि इससे समुद्र की जैव विविधता को खतरा होगा, पारंपरिक मछली पकड़ने के धंधे पर असर पड़ेगा और तटीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। इसी वजह से पिछले कुछ समय से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन चल रहा है।
मछुआरा समाज के नेता देवेंद्र तांडेल ने कहा कि गांव वाले अब आंदोलन और तेज करेंगे और प्रोजेक्ट के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाएंगे।
आंदोलन में शामिल हुए महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने वाढवण बंदरगाह को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि इस प्रोजेक्ट से राज्य को आखिर क्या फायदा होगा। सपकाळ ने दावा किया कि बंदरगाह के विकास से स्थानीय किसानों और मछुआरों के हित खतरे में पड़ेंगे और उनकी रोजी-रोटी पर ही संकट आ जाएगा।
सपकाळ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पालघर जिले के विकास से ज्यादा एक बड़े औद्योगिक समूह के हित साध रही है। उनके मुताबिक स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों को अनसुना करके यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया जा रहा है।
सपकाळ ने यह भी कहा कि जब तक वाढवण बंदरगाह प्रोजेक्ट रद्द नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने भरोसा दिया कि कांग्रेस इस आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेगी और प्रभावित नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का परोक्ष जिक्र करते हुए सपकाळ ने इशारों में कहा कि केंद्र का नेतृत्व बदले बिना इस प्रोजेक्ट को रोकना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वाढवण बंदरगाह के खिलाफ आंदोलन कामयाब हुआ, तो आगे दूसरे जन आंदोलनों को भी ताकत मिलेगी।
आंदोलन में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक अंबादास दानवे, पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकूर और कपिल पाटील, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सत्यम ठाकूर, प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बृजकिशोर दत्त, मनीष गनोरे और धनंजय शिंदे के साथ कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
पर्यावरण की रक्षा, पारंपरिक मछली पकड़ने और स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी का सवाल उठाते हुए गांव वालों ने प्रोजेक्ट रद्द करने की अपनी मांग कायम रखी है। पालघर में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक विरोध बढ़ता दिख रहा है, और अब नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा क्या होगी।
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