उकाई धरण से महाराष्ट्र को 5 टीएमसी पानी, जलशक्ति मंत्री पाटिल ने दिए तुरंत निर्देश
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की पुनर्विचार समिति की बैठक में फडणवीस की मांग पर महाराष्ट्र के हिस्से का पांच टीएमसी पानी उकाई धरण से देने के निर्देश दिए गए।
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महाराष्ट्र को नर्मदा जल विवाद के फैसले में तय हिस्से का पांच टीएमसी पानी उकाई धरण से मिलेगा। नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की उच्चस्तरीय पुनर्विचार समिति की बैठक में इसके निर्देश दिए गए। राज्य में फिलहाल सूखे के हालात हैं और आगे पानी का संकट गहराने का डर है, इसलिए इस बैठक पर सबकी नजर थी।
बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने की। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी इसमें शामिल थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र का पक्ष रखा और राज्य के हिस्से का पानी देने की मांग की।
फडणवीस ने बैठक में नर्मदा परियोजना से जुड़ी महाराष्ट्र की जिम्मेदारियों पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नर्मदा जल विवाद के फैसले में महाराष्ट्र को दस टीएमसी पानी मंजूर है। इसमें से पांच टीएमसी पानी डायवर्जन कैनाल यानी मोड़ नहर से मिलना है, जबकि बाकी पांच टीएमसी पानी उकाई धरण से देना तय हुआ था।
इसी के आधार पर फडणवीस ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री से मंजूरी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई बैठक में फैसला हो चुका है कि महाराष्ट्र को उसके हिस्से का पानी नियमों के मुताबिक दिया जाएगा। इसलिए उकाई धरण से महाराष्ट्र को पानी मिलना अपेक्षित है, यह बात उन्होंने बैठक में रखी।
फडणवीस की इस बात के बाद सी. आर. पाटिल ने तुरंत निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि महाराष्ट्र को उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए। फडणवीस ने बाद में सोशल मीडिया पर लिखा कि पाटिल ने उकाई धरण से पांच टीएमसी पानी छोड़ने के तुरंत निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जलशक्ति मंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री से डायवर्जन कैनाल की व्यवस्था के लिए जरूरी औपचारिक मंजूरी देने का भी अनुरोध किया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा और जलसंपदा विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले भी मौजूद थे। फडणवीस के मुताबिक यह नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की पुनर्विचार समिति की 15वीं बैठक थी।
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