ठाकरे गुट के पार्षद तुलसीराम शिंदे के घर को BMC का नोटिस, 3 नवंबर को तोड़ने की तारीख
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गोरेगांव वार्ड क्रमांक 40 के पार्षद तुलसीराम शिंदे के दिंडोशी के घर पर BMC ने नोटिस दिया है। भाजपा उम्मीदवार संजय आव्हाड की शिकायत के बाद कार्रवाई तय हुई, शिंदे ने इसे राजनीतिक द्वेष बताया।
मुंबई में ठाकरे की शिवसेना के पार्षद तुलसीराम शिंदे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वे गोरेगांव के वार्ड क्रमांक 40 के पार्षद हैं। दिंडोशी के संतोष नगर इलाके में उनके घर को लेकर शिकायत की गई थी कि वह अनधिकृत है। अब इस घर पर मुंबई महानगरपालिका (BMC) का बुलडोजर चलने वाला है।
शिंदे पर आरोप है कि उन्होंने झोपड़पट्टी पुनर्वास क्षेत्र में 14 फुट से ज्यादा ऊंचाई का गैरकानूनी निर्माण किया। BMC ने उन्हें कार्रवाई का नोटिस भेजा है और घर को 3 नवंबर को गिराने की तारीख तय की है।
यह शिकायत वार्ड 40 से भाजपा के उम्मीदवार संजय आव्हाड ने लिखित में BMC को दी थी। उनका कहना है कि दिंडोशी मनपा कॉलोनी के संतोष नगर में तुलसीराम शिंदे ने नियम तोड़कर 14 फुट से ऊंचा घर बनाया। आव्हाड ने सीधा आरोप लगाया है कि शिंदे ने पार्षद पद का गलत इस्तेमाल करके यह अनधिकृत निर्माण खड़ा किया।
इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए BMC ने पार्षद के घर पर तोड़क कार्रवाई के लिए 3 नवंबर का नोटिस जारी किया है। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस से अतिरिक्त बंदोबस्त भी मांगा गया है।
नोटिस मिलते ही शिंदे ने खुद ही घर खाली कर उसे तोड़ने का काम शुरू कर दिया था। लेकिन इसी दौरान मौके पर काफी गहमागहमी हो गई। शिकायत करने वाले भाजपा नेता संजय आव्हाड के बेटे वहां पहुंच गए और उन्होंने तुलसीराम शिंदे को अपना घर खुद तोड़ने से रोक दिया।
बीच-बचाव के लिए पुलिस को बुलाया गया और पार्षद को अपना घर गिराने से रोक दिया गया। शिकायतकर्ता का रुख सख्त है। उनकी मांग है कि पार्षद खुद तोड़फोड़ न करें, बल्कि मुंबई महानगरपालिका ही सीधे बुलडोजर चलाकर यह कार्रवाई करे।
इस पूरी कार्रवाई पर ठाकरे गुट के पार्षद तुलसीराम शिंदे ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा, "यह घर 1980-1985 के दौर का पुराना है। पूरे दिंडोशी इलाके में मेरे घर जितनी ही ऊंचाई वाले करीब 4 से 5 हजार घर हैं। राजनीतिक द्वेष की वजह से सिर्फ मेरे ऊपर कार्रवाई की जा रही है। अगर पालिका नियमों पर उंगली रख रही है, तो इलाके के उन सभी 4 से 5 हजार घरों पर भी पालिका बराबर कार्रवाई करके दिखाए।" शिंदे ने यही मांग रखी है।
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