सूखे वाले इलाकों में बच्चों और माताओं के पोषण पर नज़र, अदिति तटकरे के निर्देश
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सूखा प्रभावित जिलों में कुपोषण रोकने और माताओं को बिना रुकावट सुविधाएं देने को कहा।
राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों में बच्चों को कुपोषण से बचाने और गर्भवती व दूध पिलाने वाली माताओं तक न्यूट्रिशन और हेल्थ की सुविधाएं बिना किसी रुकावट पहुंचाने के लिए सभी संबंधित डिपार्टमेंट को आपस में कोऑर्डिनेशन से काम करना होगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने यह निर्देश दिया।
अदिति तटकरे सूखे की स्थिति में इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विस स्कीम के ज़रिए लागू किए जा रहे उपायों का रिव्यू करने के लिए बुलाई गई मीटिंग में बोल रही थीं। यह मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई, जिसमें उन्होंने अलग-अलग जिलों की समस्याओं की जानकारी ली।
मीटिंग में डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी डॉ. अनूप कुमार यादव, जॉइंट सेक्रेटरी वी. रा. ठाकुर, जॉइंट कमिश्नर संगीता लोंढे और अंडर सेक्रेटरी सरदार मौजूद थे। कमिश्नर माधवी सरदेशमुख ने डिपार्टमेंट के काम का प्रेजेंटेशन दिया।
मंत्री ने कहा कि रोज़ाना आंगनवाड़ियों में जाकर काम का रिव्यू किया जाए। सूखे की स्थिति में आंगनवाड़ियों को जारी रखने के बारे में संबंधित डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के निर्देशों के मुताबिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सूखा घोषित जिलों को काम का रेगुलर रिव्यू करना चाहिए।
सेक्रेटरी डॉ. अनूप कुमार यादव ने कहा कि सूखे के हालात में सभी संबंधित लोगों को अपनी ज़िम्मेदारी अच्छे से निभानी होगी, ताकि बच्चों में मॉडरेट और सीवियर कुपोषण न बढ़े। उनके मुताबिक सरकार की तरफ से दी जाने वाली सुविधाएं हर बेनिफिशियरी तक पहुंचाने के लिए कोऑर्डिनेशन से काम करना चाहिए।
अदिति तटकरे ने कहा कि जिन इलाकों में पानी की ज़्यादा कमी है, वहां डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस से कोऑर्डिनेशन करके दूसरी व्यवस्था की जानी चाहिए। वॉटर सप्लाई और हेल्थ डिपार्टमेंट की मदद से आंगनबाड़ियों को ज़रूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। माइग्रेंट वर्कर्स के परिवारों की जानकारी लेकर पेरेंट्स को गाइड किया जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई और न्यूट्रिशन सर्विस चलती रहे।
गर्भवती माताओं को भी बिना रुकावट सेवाएं दी जाएं और उनकी और उनके बच्चों की सेहत का रेगुलर ध्यान रखा जाए। मंत्री ने यह निर्देश भी दिया कि कोऑपरेटिव और प्राइवेट चीनी मिलें गन्ना मजदूरों, परिवार के मुखिया और लाभार्थियों के पैतृक गांवों की जानकारी, साथ ही संपर्क अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर जिला प्रोग्राम अधिकारी को दें।
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