साझा 7/12 की जमीन बेचने पर अब सह-हिस्सेदारों की सहमति जरूरी, फडणवीस सरकार का फैसला
सरकार ने साझा 7/12 वाली जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी रोकने के लिए सह-हिस्सेदारों की सहमति, अनापत्ति प्रमाणपत्र और भूमि अभिलेख की क प्रति जरूरी की है।
देवेंद्र फडणवीस सरकार ने साझा 7/12 वाली जमीन की बिक्री को सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब ऐसी संपत्ति बेचते वक्त उसी 7/12 पर नाम वाले सह-हिस्सेदारों की सहमति, उनका अनापत्ति प्रमाणपत्र और भूमि अभिलेख की क प्रति जरूरी कर दी गई है।
यह पहल राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की है। मकसद यह है कि एक ही 7/12 पर नाम वाले बाकी लोगों को अंधेरे में रखकर कोई सौदा न हो सके। सरकार का कहना है कि इससे जमीन के लेन-देन में होने वाली धोखाधड़ी टल सकेगी और जमीन मालिकों के साथ खरीदारों को भी बड़ा फायदा होगा।
नियम के मुताबिक कागज पूरे न हों तो दस्तावेज की रजिस्ट्री पर रोक रहेगी। यानी वैध कागजात के बिना सौदा आगे नहीं बढ़ेगा।
नए नियम में क्या है, यह सीधे समझ लीजिए। किसी भी साझा 7/12 उतारे वाली जमीन या संपत्ति को बेचते समय सह-हिस्सेदारों की लिखित सहमति लेनी होगी। 7/12 पर नाम वाले सभी हिस्सेदारों की यह सहमति खरीद-बिक्री के लिए जरूरी है। इन सभी हिस्सेदारों का विधिवत अनापत्ति प्रमाणपत्र जोड़े बिना सौदा पूरा नहीं होगा।
इसके लिए भूमि अभिलेख विभाग की क प्रति भी चाहिए। यानी जमीन की मापी और बंटवारे से जुड़ी भूमि अभिलेख विभाग की अधिकृत मंजूरी लेनी पड़ेगी।
गांव और शहर, दोनों जगह एक ही 7/12 पर कई भाइयों और बहनों के नाम होते हैं। कई बार पुराने 7/12 पर पिता, बुआ और चाचा के नाम भी चलते हैं। ऐसे मामलों में कई हिस्सेदार दूसरों को भनक लगे बिना फर्जी कागजात बनाकर जमीन किसी तीसरे आदमी को बेच देते हैं।
जमीन धोखाधड़ी के हजारों मामले अदालतों में लंबित हैं। खबर के मुताबिक इस नए नियम से न्यायपालिका पर पड़ने वाला यह बोझ काफी कम होगा। साथ ही गैरकानूनी जमीन खरीद-बिक्री पर भी लगाम लगेगी।
राजस्व प्रशासन ने नए नियम जारी कर दिए हैं। उनके मुताबिक जमीन की खरीद-बिक्री के लिए सारे वैध कागजात और सह-हिस्सेदारों की सहमति चाहिए। उन सभी का अनापत्ति प्रमाणपत्र दिखाना पड़ेगा। उप-पंजीयक दफ्तर में सौदे के वक्त अगर ऐसे सह-हिस्सेदार मौजूद नहीं हुए, तो दस्तावेजों की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी।
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