फडणवीस बोले, देश को मोदीजी चाहिए; राहुल गांधी पर अतिवामपंथी व्यवस्था खड़ी करने का आरोप
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र बचाने के लिए वे मैदान में उतरे हैं। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर रेजीम चेंज की कोशिश का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश को मोदीजी चाहिए और लोकतंत्र बचाने के लिए वे सड़क पर उतरे हैं। उनके मुताबिक यह लड़ाई मोदी, भाजपा या एनडीए के खिलाफ नहीं, बल्कि एक छुपी हुई जंग है। फडणवीस ने कहा कि जब तक चांद और सूरज हैं, तब तक संविधान रहना चाहिए। विचार कोई भी हो, इस लड़ाई में हमारे साथ कूद पड़िए, यह अपील भी उन्होंने की।
फडणवीस ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अल्ट्रा लेफ्टिस्ट विचारों की सरकार लाना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कैसे बचाना है, यह हमें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बताया है। राहुल गांधी के बारे में उनका कहना था कि वे अतिवामपंथी व्यवस्था खड़ी करना चाहते हैं।
राहुल गांधी से मुखातिब होकर फडणवीस ने कहा कि यह भारत है और यहां बाबासाहेब का संविधान है। उनके शब्दों में, तुम्हारी दादी ने कोशिश की थी, वे मजबूत थीं, नेता थीं, फिर भी संविधान को खत्म नहीं कर सकीं, तो तुम किस खेत की मूली हो राहुल गांधी। फडणवीस ने कहा कि यह लड़ाई भाजपा की नहीं, देश के संविधान की है। उन्होंने संकल्प लेने को कहा कि जब तक संकट खत्म नहीं होता, तब तक रुकना नहीं है।
फडणवीस के मुताबिक एक अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत कांग्रेस के कच्चे बच्चे रोज मोर्चे निकाल रहे हैं, ताकि संविधान की व्यवस्था खत्म हो। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था और पूरे देश की संस्थाएं बदलने को रेजीम चेंज कहते हैं। फडणवीस ने दावा किया कि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में रेजीम चेंज हुआ और संविधान बदला गया। उन्होंने कहा कि चार बार पूछने पर जवाब मिला कि हां, रेजीम चेंज करना है। उद्धव ठाकरे को इसका मतलब पता है या नहीं, यह नहीं मालूम, पर वे भी यही बोले, ऐसा फडणवीस ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि खून की आखिरी बूंद तक रेजीम चेंज नहीं होने देंगे।
इतिहास का हवाला देते हुए फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस ने बार-बार लोकतंत्र को पैरों तले रौंदा। इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध ठहराया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसमें तथ्य माना था। उनके मुताबिक तब प्रधानमंत्री बने रह सकते थे, पर लोकसभा में बोल या वोट नहीं दे सकते थे। फडणवीस का कहना था कि कांग्रेस ने पाशविक बहुमत के दम पर प्रधानमंत्री को संविधान से ऊपर कर दिया। उन्होंने कहा कि 1976 में मौलिक अधिकार ठप कर दिए गए और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बंद किया गया। 1977 में मोरारजी भाई और अटल बिहारी ने संशोधन करके प्रधानमंत्री को संविधान के नीचे लाया और मौलिक अधिकार बहाल किए, ऐसा उन्होंने बताया।
फडणवीस ने कहा कि इनके मनसूबे आज के नहीं हैं और यही काम अब इंदिरा गांधी के नाती ने शुरू किया है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, बोतल नई है, शराब वही है।
लाल और नीले संविधान पर उन्होंने कहा कि वे लाल संविधान लेते हैं, जबकि हमने नीला देखा था। फडणवीस के मुताबिक यही लाल किताब है, जिसने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में रेजीम चेंज कराया, और वही किताब फ्रांस और डेनमार्क में अराजकता फैलाने के लिए इस्तेमाल हो रही है। उन्होंने कहा कि संविधान की किताब दिखाते हैं, पर अंदर कुछ नहीं है। आरबीआई, आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर मोर्चे निकाले गए, न्याय मांगते नहीं, मोर्चा निकालते हैं, और देश में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, यह भी उन्होंने कहा।
बुद्धिजीवियों पर फडणवीस बोले कि उन्हें हैरानी है। उनके शब्दों में ये बाजारू हैं, जो लोकतंत्र खतरे में है कहते रहते हैं और मोदी के खिलाफ बकबक करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि संस्था न्याय न दे तो उसे तोड़ दो, यानी संविधान तोड़ दो, यही इनकी कोशिश है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।