पश्चिम रेलवे चर्चगेट से विरार तक अंडरग्राउंड लोकल नेटवर्क पर कर रही विचार
पश्चिम रेलवे चर्चगेट और विरार के बीच भूमिगत उपनगरीय रेल नेटवर्क बनाने पर विचार कर रही है, लेकिन रेलवे बोर्ड से फंड की मंजूरी का इंतजार है।
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पश्चिम रेलवे चर्चगेट और विरार के बीच अंडरग्राउंड उपनगरीय रेल नेटवर्क बनाने पर विचार कर रही है। लेकिन अभी यह प्रस्ताव व्यवहार्यता अध्ययन के स्टेज तक भी नहीं पहुंचा है। वजह यह है कि निर्माण विभाग रेलवे बोर्ड से फंड की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि अगर प्रोजेक्ट व्यवहार्य पाया गया, तो उसकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जाएगी। उनके शब्दों में, "एक बार फंड मंजूर हो जाए, तो हम व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करेंगे। अगर यह प्रोजेक्ट व्यवहार्य निकला, तो डीपीआर बनाई जाएगी।"
यह प्रस्ताव 3 मार्च 2026 की एक चिट्ठी पर आधारित है। उस चिट्ठी में चर्चगेट और विरार के बीच भूमिगत उपनगरीय रेल नेटवर्क की संकल्पना तैयार करने और व्यवहार्यता अध्ययन (FLS) के लिए प्रस्ताव मंगाए गए थे।
रेल मंत्री के अहमदाबाद दौरे के दौरान इस मामले का संज्ञान लिया गया। विस्तृत प्लानिंग और अमल की तरफ बढ़ने से पहले फौरी कदम यही है कि जांच की जाए कि ऐसा नेटवर्क बन सकता है या नहीं।
प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है। अध्ययन या निर्माण के लिए कोई समय सीमा घोषित नहीं की गई है।
यह योजना पश्चिम रेलवे पर भारी उपनगरीय ट्रैफिक के बीच सामने आई है। यहां से फिलहाल रोज 1,414 फेरे चलते हैं। मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क से बड़ी तादाद में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में भूमिगत कनेक्शन की संभावना से कई सवाल खड़े होते हैं, जैसे क्षमता का विस्तार, जमीन की उपलब्धता, निर्माण का खर्च और नए इन्फ्रास्ट्रक्चर को मौजूदा रेल व्यवस्था से जोड़ना।
इसी बीच मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) भी पाडेको नाम की एजेंसी के जरिए दो कॉरिडोर पर भूमिगत उपनगरीय कनेक्टिविटी की जांच कर रही है। ये कॉरिडोर हैं चर्चगेट-विरार और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT)-परेल।
हालांकि यह अध्ययन अभी चल रहा है और उसकी रिपोर्ट अब तक पेश नहीं की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एमआरवीसी और संबंधित संस्था ने हाल ही में इस काम पर चर्चा के लिए बैठक की। उसमें कॉर्पोरेशन ने सलाहकार से और जानकारी मांगी। अध्ययन के नतीजे सामने आने में अभी और वक्त लगने की संभावना है।
दोनों पहल अलग-अलग हैं। इनकी प्रगति संबंधित अध्ययनों के पूरे होने और उनकी व्यवहार्यता के आकलन पर निर्भर करेगी। एक तरफ पश्चिम रेलवे चर्चगेट-विरार कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने को फंड का इंतजार कर रही है, तो दूसरी तरफ एमआरवीसी भूमिगत कनेक्शन का अपना आकलन खुद कर रही है।
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