मुंबई में 19% आबादी अब भी सीवरेज से बाहर, BMC रोडमैप के लिए रखेगी कंसल्टेंट
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मुंबई सीवरेज इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम को करीब दस साल हो गए, पर BMC 100% कवरेज का टारगेट पूरा नहीं कर पाई है। अब आगे की योजना बनाने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किए जाएंगे।
मुंबई सीवरेज इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (MSIP) को शुरू हुए करीब दस साल हो चुके हैं, लेकिन बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) अब तक पूरे शहर में 100% सीवरेज कवरेज का अपना टारगेट हासिल नहीं कर पाई है। शहर की करीब 19% आबादी के पास आज भी सीवरेज नेटवर्क नहीं है। इसी वजह से BMC अब कंसल्टेंट नियुक्त करने की योजना बना रही है, जो नेटवर्क को बढ़ाने और मजबूत करने का रोडमैप तैयार करेंगे।
BMC के डेटा के मुताबिक मुंबई में फिलहाल 2,080.279 km का सीवरेज नेटवर्क चालू है। यह शहर के 85.74% ज्योग्राफिकल एरिया को कवर करता है और 81.28% आबादी को सर्विस देता है।
सबसे बड़ी कमी झुग्गी-झोपड़ियों में है। वहां अंडरग्राउंड सीवेज लाइन नहीं है, इसलिए कई घरों को सेप्टिक टैंक के भरोसे रहना पड़ता है। मुंबई की करीब 60% आबादी झुग्गी-झोपड़ियों में रहती है, तो साफ-सफाई का इंफ्रास्ट्रक्चर कम पड़ना पब्लिक हेल्थ के लिहाज से बड़ी चिंता बन गया है। अगर सेप्टिक टैंक की मेंटेनेंस ठीक न हो तो उसमें ज़हरीली गैस जमा हो सकती है, जिससे खतरनाक धमाके और जानलेवा हादसे हो सकते हैं। सीवेज कनेक्शन न होने का असर स्वच्छ भारत अभियान के तहत घरों में टॉयलेट बनाने की कोशिशों पर भी पड़ा है, खासकर घनी बस्तियों में, जहां जगह पहले से कम है।
कई इलाकों में झुग्गी-झोपड़ियों और इंडस्ट्रियल जगहों का बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी सीधे पास की नदियों, नालों और बारिश के पानी के चैनलों में चला जाता है। इससे पानी का प्रदूषण होता है। MSIP के अगले फेज़ में BMC इस गंदे पानी के बहाव को सीवरेज नेटवर्क की तरफ मोड़ने की योजना बना रही है। सीवेज से होने वाले प्रदूषण को खत्म करने के लिए एक नदी को फिर से ज़िंदा करने का प्लान भी तैयार किया गया है।
प्रस्तावित विस्तार में वे इलाके भी आएंगे जो MHADA, एयरपोर्ट अथॉरिटी, रेलवे और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी जैसी दूसरी अथॉरिटी के तहत आते हैं। इन जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम आसान करने के लिए BMC नियमों में बदलाव पर भी विचार कर रही है।
प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ने की कई वजहें हैं: मुश्किल भौगोलिक हालात, ज़मीन के नीचे की अनिश्चित बनावट, ज़मीन की कमी और कानूनी मंज़ूरी मिलने में देरी। CRZ एरिया, जंगल की ज़मीन और अलग-अलग सरकारी डिपार्टमेंट के कंट्रोल वाली प्रॉपर्टी से सीवर लाइन निकालने के लिए कई परमिशन लेनी पड़ती हैं।
इन अड़चनों से निपटने के लिए BMC ने एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनवाने के लिए कंसल्टेंट अपॉइंट करने का फ़ैसला किया है। खबर है कि 12 कंसल्टिंग एजेंसियों की लिस्ट शॉर्टलिस्ट की गई है।
मुंबई का सीवरेज सिस्टम 130 साल से ज़्यादा पुराना है। 2016-17 में जब MSIP शुरू हुआ, तब शहर में करीब 1,830 km सीवर लाइनें थीं, जो अब बढ़कर 2,080.279 km हो गई हैं। इसके बावजूद 100% कवरेज का टारगेट अभी दूर है। उम्मीद है कि आने वाली DPR इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों की पहचान करेगी। साथ ही कम सुविधा वाले एरिया तक सीवरेज सर्विस पहुंचाने, बिना ट्रीट किए गंदे पानी का डिस्चार्ज घटाने और पूरे मुंबई में सफ़ाई बेहतर करने के उपायों की रूपरेखा भी उसमें होगी।
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