मुंबई की डायरी: आर्ट नाइट, स्टीफन ऑल्टर की आखिरी बुलेट और लेडीज लोकल की कविताएं
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मरीन ड्राइव की टी-शर्ट से लेकर लंदन जा रहे सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल तक, शहर के कला और संस्कृति जगत की पांच छोटी खबरें।
मरीन ड्राइव पर एक सैलानी की टी-शर्ट इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रही है। शेयर बाजार के अनिश्चित माहौल में उस पर लिखा संदेश बिल्कुल वक्त के हिसाब से है।
कैम्प्स कॉर्नर में द मेसी आर्ट हाउस अब बड़ों के लिए भी जगह बना रहा है। आम धारणा है कि आर्ट क्लास सिर्फ बच्चों के लिए होती है, लेकिन यहां हर गुरुवार को होने वाली आर्ट नाइट्स में बड़े लोगों को बुलाया जाता है। वहां फोन एक तरफ रखकर मिट्टी, कैनवस और मजेदार आर्ट प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाने होते हैं। नए लोगों का भी स्वागत है, क्योंकि सामग्री, तकनीक और आइडिया शुरुआत के लिए स्टूडियो खुद देता है।
स्टूडियो में बर्थडे, दोस्तों की महफिल और टीम की शाम के लिए प्राइवेट आर्ट और क्राफ्ट वर्कशॉप भी होती हैं। संस्थापक उपासना पोद्दार ने इस कॉलम के लेखक से कहा, "हम आर्टिस्ट बनाने नहीं निकले हैं। आप कुछ भी उकेरिए, थोड़ी मस्ती कीजिए, नाखूनों में मिट्टी और कपड़ों पर रंग लगने दीजिए। इसी बीच कहीं आप सच में सुकून पा लेते हैं। आर्ट तो बस बहाना है, असली बात खुद को ढीला छोड़ना है।"
सिक्किम लिटरेचर फेस्टिवल के पैनलों में स्टीफन ऑल्टर सत्तर के आसपास की उम्र के एक मिलनसार शख्स की तरह प्रकृति संरक्षण और दर्शन की सलाह देते दिखते हैं, पर दिल से वे बाइकर हैं। प्रकृति पर खूब लिखने वाले इस लेखक ने इस कॉलम के लेखक को बताया कि दिसंबर में उनकी अगली किताब "माय लास्ट बुलेट" आ रही है। किताब उनकी पसंदीदा सवारियों और लेखन के इर्द-गिर्द घूमेगी।
ऑल्टर हंसते हुए बोले, "1977 में जब मैंने अपना पहला उपन्यास बेचा, तो मुझे 500 पाउंड मिले और मैंने सारे पैसे एक बुलेट पर खर्च कर दिए। अब 70 की उम्र में मैं मोटरसाइकिल ज्यादा नहीं चला पाऊंगा। इसलिए मैंने हाल ही में अपनी आखिरी बुलेट खरीदी। उम्मीद है कि रॉयल एनफील्ड से प्यार करने वाला हर शख्स इसे पढ़ेगा।" उन्हें पुरानी हिंदी फिल्मों का शौक है, खासकर देव आनंद और अमिताभ बच्चन की फिल्मों का। इसलिए जवान ऑल्टर को मसूरी की गलियों में बुलेट दौड़ाते हुए सोचना मुश्किल नहीं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को पर्दे पर एक और ऑल्टर की जरूरत थी।
लेडीज कंपार्टमेंट ने अनगिनत बातचीत सुनी हैं, रोजमर्रा के नाटक देखे हैं और अलग-अलग पृष्ठभूमि की औरतों को सफर कराया है। अब उसे अपनी कविता भरी श्रद्धांजलि मिल रही है। अभिनेत्री और थिएटर कलाकार अपूर्वा कदम "लेडीज लोकल पोएट्री क्रॉल" की मेजबानी करेंगी। इसमें महिला कवियों की कविताएं होंगी, जो लेडीज डिब्बे की बेलगाम, उथल-पुथल भरी और आम जिंदगी की हकीकतों पर हैं।
मराठी और अंग्रेजी में पाठ होगा और साथ में अनुवाद भी रहेगा। द बॉम्बे पोएट्री क्रॉल की संस्थापक सरण्या सुब्रमण्यन ने कहा, "लेडीज कंपार्टमेंट ऐसी जगह है जहां भेदभाव भी है और आजादी भी। शहर में यह एक ऐसी जगह है जहां अलग-अलग तबकों की इतनी औरतें एक साथ आती हैं।" एक घंटे का यह ट्रेन सफर 8 नवंबर को दादर स्टेशन से शुरू होगा। ज्यादा जानकारी के लिए @The Bombay poetry crawl देखें।
जून 2027 में सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल यूरोप की उड़ान भरेगा और लंदन में अपना पहला संस्करण करेगा। यह यादगार होने वाला है, क्योंकि फेस्टिवल की सभी महिलाओं वाली क्यूरेटोरियल टीम में मुंबई के कला और संगीत जगत की दो बड़ी हस्तियां शामिल हैं।
संगीतकार स्नेहा खानवलकर और कला समीक्षक नैन्सी अडजानिया टीम से जुड़ेंगी। वे संगीत, नृत्य, खान-पान की कला और नए मीडिया की आवाजों को लंदन के म्यूजियमों, कैफे और सड़कों तक पहुंचाएंगी। इस सांस्कृतिक धावे का सबको इंतजार रहेगा। इस प्रदर्शन में ग्रेट एग्जिबिशन रोड फेस्टिवल भी शामिल रहेगा।
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