महाराष्ट्र के सभी स्कूलों में 18 से 31 अक्टूबर तक चलेगा खास सफाई अभियान
राज्य सरकार ने 18 से 31 अक्टूबर, 2026 तक सभी स्कूलों में 'चलो स्कूल चलें... स्पेशल स्कूल सफाई अभियान' चलाने का फैसला किया है।
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राज्य सरकार ने फैसला किया है कि 18 से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच राज्य के हर स्कूल में 'चलो स्कूल चलें... स्पेशल स्कूल सफाई अभियान' चलाया जाएगा। इसमें स्कूल मैनेजमेंट कमिटी, टीचर, स्टूडेंट, पेरेंट्स, पुराने स्टूडेंट, गांव वाले और लोकल कम्युनिटी के लोग साथ आएंगे। सबकी मदद से स्कूलों की सफाई, सुंदरता और रखरखाव का काम होगा, ताकि पढ़ाई का माहौल और बेहतर बने।
स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने इसके बारे में 16 अक्टूबर, 2026 को एक सर्कुलर जारी किया है। अभियान का मकसद स्कूल परिसर को साफ, सुंदर, सुरक्षित और खुशनुमा रखना है। साथ ही स्टूडेंट्स में सफाई, पर्यावरण संरक्षण, काम की इज्ज़त, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना जगाना भी इसका मकसद है। यह अभियान समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूलों में ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं और पढ़ाई का अच्छा माहौल बनाने की कोशिशों को आगे बढ़ाएगा।
यह ड्राइव दो फेज़ में चलेगी। पहले फेज़ में 18 से 24 अक्टूबर के बीच हर स्कूल में स्कूल मैनेजमेंट कमिटी की एक खास मीटिंग होगी। इस मीटिंग में टीचर्स, पेरेंट्स, गांववालों और पुराने स्टूडेंट्स की हिस्सेदारी तय की जाएगी। इसके बाद क्लासरूम, ऑफिस, लैब, लाइब्रेरी, कंप्यूटर रूम, टॉयलेट, पीने के पानी के सिस्टम और प्लेग्राउंड का इंस्पेक्शन होगा। इंस्पेक्शन के आधार पर हर स्कूल अपना एक्शन प्लान बनाएगा, जिसमें सफाई, रिपेयर और ब्यूटीफिकेशन की बातें होंगी।
दूसरे फेज़ में, यानी 25 से 31 अक्टूबर के बीच, असल काम होगा। क्लासरूम और बाकी कमरों के फर्श, दीवारें, दरवाजे, खिड़कियां, छत और पंखों की अच्छी तरह सफाई की जाएगी। टॉयलेट, हाथ धोने की जगह, पीने के पानी की टंकियां और पानी सप्लाई सिस्टम भी साफ किए जाएंगे। स्कूल कैंपस, प्लेग्राउंड और एंट्रेंस से कचरा और फालतू सामान हटाया जाएगा और कचरे को सही तरीके से अलग किया जाएगा। मच्छरों, कीड़ों और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स को खत्म करने के लिए ज़रूरी कदम भी उठाए जाएंगे।
कैंपेन में बिजली सिस्टम, पानी की सप्लाई, टॉयलेट, फर्नीचर, दरवाज़े और खिड़कियों की जांच होगी और ज़रूरी छोटी-मोटी मरम्मत और मेंटेनेंस किया जाएगा। स्टूडेंट्स की सुरक्षा के लिए खतरनाक बिजली कनेक्शन, टूटे फर्नीचर और असुरक्षित जगहों की तुरंत मरम्मत होगी। बेकार सामान को तय तरीके से अलग करके फेंका जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि गहरी सफाई, छोटे-मोटे मेंटेनेंस, मरम्मत और दूसरी मंज़ूर चीज़ों का खर्च स्कूलों को समग्र शिक्षा योजना के तहत मिली कंसोलिडेटेड ग्रांट से किया जाएगा। स्टूडेंट्स से किसी भी तरह का कोई ज़रूरी फाइनेंशियल योगदान या फंड नहीं लिया जाएगा।
'मेरा स्कूल-मेरी ज़िम्मेदारी' की भावना से स्कूल मैनेजमेंट कमिटी, टीचर, पेरेंट्स, एलुमनाई एसोसिएशन, गांव वाले, लोकल पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव और NGO इस अभियान में एक्टिव रूप से शामिल होंगे। उपलब्धता के हिसाब से CSR और लोकल सोशल ऑर्गनाइज़ेशन भी जुड़ेंगे। स्कूल लेवल पर कैंपेन को लागू करने की पूरी ज़िम्मेदारी प्रिंसिपल की होगी।
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