कैंसर मरीजों को राहत: PET-CT स्कैन अब महात्मा फुले और आयुष्मान भारत योजना के दायरे में
राज्य सरकार ने PET-CT स्कैन को महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल किया है।
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राज्य सरकार ने कैंसर के मरीजों के लिए एक अहम फैसला लिया है। PET-CT स्कैन अब महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मिलेगा। यह महंगा टेस्ट कैंसर का सही डायग्नोसिस करने, बीमारी का स्टेज पता लगाने और इलाज का असर देखने के लिए ज़रूरी माना जाता है। इस फैसले से मरीजों को अपनी जेब से टेस्ट पर खर्च करने का बोझ कम होगा।
पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने इस बारे में सरकारी फैसला जारी किया है। इसके मुताबिक PET-CT स्कैन को कैंसर के 63 ट्रीटमेंट पैकेज में 'एडिशनल डायग्नोस्टिक प्रोसीजर' के तौर पर जोड़ा गया है। इसके साथ ही चुने हुए 13 तरह के कैंसर के इलाज के लिए इसे 'इंडिपेंडेंट डायग्नोस्टिक प्रोसीजर' के तौर पर भी मंज़ूरी मिली है।
टेस्ट महंगा होने की वजह से मरीज अक्सर PET-CT को टाल देते थे या उससे बचते थे। इसका नतीजा यह होता था कि बीमारी का नेचर समझने और सही समय पर इलाज का प्लान बनाने में देरी हो जाती थी। इसी को देखते हुए लोग और जुड़े हुए अस्पताल मांग कर रहे थे कि इस स्कैन को योजना में शामिल किया जाए।
इस मांग पर पब्लिक हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मिनिस्टर प्रकाश अबितकर के निर्देश पर एक इंडिपेंडेंट स्टडी कमेटी बनाई गई थी। सरकार ने कमेटी की सिफारिशों पर विचार करने के बाद यह फैसला लिया। हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि इससे कैंसर का इलाज ज़्यादा आसान होगा और समय पर शुरू हो सकेगा। साथ ही महंगे टेस्ट पर मरीजों का फाइनेंशियल बोझ भी घटेगा।
पहले यह सुविधा 44 ट्रीटमेंट पैकेज में शामिल थी। अब ऐड-ऑन डायग्नोस्टिक प्रोसीजर के तौर पर 63 पैकेज में यह मिलेगी, यानी ऐसे एडिशनल पैकेज की संख्या बढ़ गई है। इससे इलाज के लिए ज़रूरी जांच ज़्यादा बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो सकेगी। 13 तरह के कैंसर के इलाज में इसे अलग या रेगुलर प्राइमरी प्रोसीजर के तौर पर मंज़ूरी उन मामलों में दी गई है, जहां यह क्लिनिकली फायदेमंद साबित हुआ है।
PET-CT जांच के रेट तय कर दिए गए हैं। पूरे शरीर की जांच के लिए Rs 20,400, दिमाग के लिए Rs 14,650, गैलियम-68 के लिए Rs 15,000 और कार्डियक के लिए Rs 9,400 रखे गए हैं। अस्पतालों को सरकारी फैसले में बताई गई शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा।
शर्तों के मुताबिक जांच की मेडिकल ज़रूरत को संबंधित एक्सपर्ट डॉक्टर को सर्टिफ़ाई करना होगा। मान्यता प्राप्त अस्पताल के पास ज़रूरी तकनीकी सुविधाएं, उपकरण, योग्य कर्मचारी और अपना इन-हाउस PET-CT सेंटर होना चाहिए। जांच से पहले पहले से मंज़ूरी लेना और ज़रूरी मेडिकल डॉक्यूमेंट जमा करना भी ज़रूरी होगा।
फैसले को असरदार तरीके से लागू करने के लिए स्टेट हेल्थ गारंटी सोसाइटी को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के TMS 2.0 सिस्टम में ज़रूरी बदलाव के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। हेल्थ मिनिस्टर ने भरोसा जताया कि ज़रूरतमंद नागरिकों को ये सुविधाएं मिलने से कैंसर की सही और समय पर पहचान और इलाज की प्लानिंग में मदद मिलेगी, और यह कैंसर के खिलाफ राज्य सरकार की लड़ाई में एक अहम कदम होगा।
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