ITBP प्रमुख के बयान के बाद शिवसेना (UBT) ने सीमा की सुरक्षा पर केंद्र से सवाल पूछे
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान के बाद अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सीमा की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। वजह है इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर का हालिया बयान। कपूर ने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की झड़पें हो रही हैं और अब भी जारी हैं।
सोमवार को पार्टी के मुखपत्र सामना में एक संपादकीय छपा। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी ने इसमें भाजपा की अगुवाई वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह सीमा के हालात की जानकारी छुपा रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में जवाबदेही तय नहीं कर रही।
कपूर ने हाल में कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर कई जगहों पर भारतीय और चीनी फौजों का आमना-सामना हुआ है और यह सिलसिला चल रहा है। उन्होंने इन झड़पों के दौरान ITBP की नई बनी शौर्य कमांडो टीमों की भूमिका की तारीफ भी की।
संपादकीय का दावा है कि चीनी सैनिक असाफिला इलाके में भारतीय जमीन में घुस आए, छह से सात किलोमीटर आगे बढ़े और वहां कैंप लगा लिए। हालांकि कपूर के सार्वजनिक रूप से सामने आए बयान में इस दूरी या संपादकीय में दी गई सभी बातों की अलग से पुष्टि नहीं हुई है।
मामला तब और गरमाया जब बताया गया कि कपूर के भाषण का वीडियो ITBP के आधिकारिक ऑनलाइन चैनलों से हटा दिया गया। वीडियो हटाने की कोई पुष्ट वजह अब तक सामने नहीं आई है।
संपादकीय में आरोप है कि सरकार ने चीनी गतिविधियों को लेकर पहले मिली चेतावनियों को हवा में उड़ा दिया। इसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अरुणाचल में कथित चीनी घुसपैठ वाले पुराने बयानों का जिक्र है। साथ ही स्थानीय आदिवासी समुदायों और सोशल मीडिया पर बात रखने वाले नौजवानों के बयान भी गिनाए गए हैं।
संपादकीय में कहा गया, "नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक साल पहले चेताया था कि चीन अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह समेत शीर्ष नेताओं ने उनके बयानों को झूठा प्रचार बताकर उन्हीं को दोषी ठहराया। अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज इलाकों के आदिवासी समुदायों और चीनी घुसपैठ पर सोशल मीडिया रील डालने वाले नौजवानों को भी इसी तरह चुप करा दिया गया और सरकार ने उनकी बातों को दुश्मन का प्रचार करार दिया।"
पार्टी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण Four Stars of Destiny का भी जिक्र किया। यह किताब जरूरी समीक्षा और मंजूरी की प्रक्रिया के चलते अब तक छपी नहीं है। संपादकीय ने 31 अगस्त 2020 को पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य टकराव से जुड़े अंश गिनाए, जब चीनी सैनिकों की हलचल के बीच नरवणे ने कथित तौर पर कार्रवाई के निर्देश मांगे थे। उसका आरोप है कि इस ब्यौरे से संकट के दौरान फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठते हैं।
संपादकीय में सीमा की इन कथित झड़पों की तुलना सितंबर में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से की गई। पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के अभियान का भी हवाला दिया गया, जिन्होंने लद्दाख में चीनी गतिविधियों की चिंता उठाई थी। आरोप है कि आलोचकों पर राजनीतिक हमले हुए।
पार्टी ने पुलवामा हमले, पहलगाम हमले और सीमा के ताजा हालात पर सरकार के जवाब पर सवाल उठाए। उसका कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं पर ज्यादा पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही जरूरी है।
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