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इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस: बॉम्बे हाईकोर्ट में आज याचिका पर सुनवाई

इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस: बॉम्बे हाईकोर्ट में आज याचिका पर सुनवाई तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अभिनेता इमरान खान की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में आज, मंगलवार 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी। 43 साल के इमरान ने यह याचिका फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (FRRO), मुंबई के नोटिस के खिलाफ दायर की है। सुनवाई पहले सोमवार 26 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन उसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया।

इमरान ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड धारक हैं और भारत में रहते हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल कर 10 अक्टूबर की तारीख वाले लीव इंडिया नोटिस (LIN) को चुनौती दी है। इस नोटिस में उनसे कहा गया है कि वे 28 अक्टूबर तक या उससे पहले भारत छोड़ दें। याचिका में FRRO की अपनाई हुई प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया है।

नोटिस में आरोप है कि इमरान ने एक प्रदर्शन में हिस्सा लेकर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट का उल्लंघन किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था। यह कार्रवाई बीजेपी नेता किरीट सोमैया की 12 अक्टूबर की पुलिस शिकायत के बाद हुई।

सोमवार को मामला चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच के सामने आया था। इमरान के वकील वेंकटेश धोंड और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, दोनों ने मामले को मंगलवार के लिए लिस्ट करने की गुजारिश की। कोर्ट ने यह बात मान ली।

10 अक्टूबर को इमरान को अगस्त क्रांति मैदान के पास पुलिस की वैन में ले जाते देखा गया था। सोशल मीडिया पर दिखा कि वे वैन के अंदर से विक्ट्री का V साइन दिखा रहे हैं। साथ में कैप्शन था: "Apparently, I am going for a drive."

हाईकोर्ट में 17 अक्टूबर को दायर याचिका में इमरान का दावा है कि वे न तो उस जमावड़े में शामिल हुए थे और न ही उसके आयोजकों से उनका कोई वास्ता है। याचिका के मुताबिक यह "patent non-application of mind and the arbitrary targeting" यानी बिना सोचे-समझे और मनमाने ढंग से एक पब्लिक फिगर को निशाना बनाने का मामला है।

इमरान की याचिका में कहा गया है, "Not only is the notice manifestly disproportionate; if implemented, it would reduce the very principles of natural justice that the authorities are duty-bound to uphold, to nothing but a dead letter।" याचिका में नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।

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