बीएमसी मुंबई के 48 हादसे वाले स्पॉट पर 18.25 करोड़ रुपये की सड़क सुरक्षा का काम कराएगी
बीएमसी ने मुंबई ट्रैफिक पुलिस के पहचाने 48 हाई-रिस्क जंक्शनों पर सुधार के लिए Rs 18.25 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है।
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बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी बीएमसी ने मुंबई में 48 ऐसी जगहों पर सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए Rs 18.25 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव रखा है, जहाँ अक्सर हादसे होते हैं। इस प्रोजेक्ट का मकसद इंजीनियरिंग के उपायों से सड़क हादसे कम करना और ट्रैफिक का इंतज़ाम बेहतर करना है। ये वो हाई-रिस्क जंक्शन हैं जिन्हें मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने पहचाना था।
बीएमसी ने ठेका मेसर्स प्रगति एंटरप्राइजेज को देने की सिफारिश की है। कंपनी ने बीएमसी के अनुमान से 36% कम बोली लगाई और इसी वजह से सबसे कम बोली वाली बनी। प्रस्ताव मंजूरी के लिए स्टैंडिंग कमेटी और संबंधित सुधार कमेटियों को भेजा गया है। इस पर बुधवार को चर्चा होनी है।
यह काम मुंबई शहर, पूर्वी उपनगरों और पश्चिमी उपनगरों की हादसे वाली जगहों पर होगा। इसमें सड़क की विजिबिलिटी, ट्रैफिक की आवाजाही और सेफ्टी पर ध्यान दिया जाएगा। रोड डिवाइडर और मीडियन बैरियर लगाए जाएंगे, थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग होगी, ट्रैफिक इंस्ट्रक्शन और डायरेक्शन साइनबोर्ड लगेंगे, टू-वे पेवमेंट मार्कर लगाए जाएंगे और चुने हुए जंक्शनों पर ट्रैफिक आइलैंड बनेंगे। बीएमसी इन उपायों के लागू होने के बाद उनका असर भी आँकना चाहती है और जहाँ ज़रूरत हो, शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म उपाय तय करना चाहती है।
बीएमसी ने USOR-2023 रेट शेड्यूल के हिसाब से GST छोड़कर Rs 22.17 करोड़ का शुरुआती अनुमान बनाया था। पाँच कॉन्ट्रैक्टरों ने बोली लगाई और उनके फाइनेंशियल ऑफर 10 जुलाई, 2026 को खोले गए। प्रगति एंटरप्राइजेज ने GST छोड़कर Rs 14.19 करोड़ का कोटेशन दिया। सी आर शाह ने Rs 14.79 करोड़, ए एस के कंस्ट्रक्शन कंपनी ने Rs 15.08 करोड़, कमला कंस्ट्रक्शन कंपनी ने Rs 17.18 करोड़ और श्रीजी इंफ्रास्पेस प्राइवेट लिमिटेड ने Rs 20.39 करोड़ का कोटेशन दिया।
रोड्स एंड ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने कहा कि प्रगति एंटरप्राइजेज ने ज़रूरी रेट एनालिसिस जमा कर दिया है और उसके रेट सही और वाजिब हैं। प्रस्तावित कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू लगभग Rs 18.25 करोड़ है, जिसमें 18% GST और बताई गई कंटिंजेंसी शामिल हैं। एडिशनल चार्ज जोड़ने पर कुल अनुमानित प्रोजेक्ट कॉस्ट लगभग Rs 22.08 करोड़ बैठती है।
इन 48 ब्लैक स्पॉट की पहचान जॉइंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ट्रैफिक) के ऑफिस से मिली लिस्ट के आधार पर हुई थी। इन्हें हाई-रिस्क इलाका माना जाता है, जहाँ बार-बार होते हादसों ने सुधार के उपायों की ज़रूरत दिखाई है।
सिविक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक मुंबई में लगभग 2,000 km का रोड नेटवर्क है, जो 475 sq km में फैला है। रजिस्टर्ड गाड़ियाँ बढ़ने से शहर की सीमित सड़कों पर दबाव बढ़ा है, जिससे भीड़ और हादसों का खतरा बढ़ गया है। बड़ी सड़कें, बिज़ी जंक्शन, फ्लाईओवर के आने-जाने के रास्ते, और कोस्टल रोड व ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिंग रूट के एंट्री-एग्ज़िट पॉइंट उन जगहों में हैं जहाँ ट्रैफिक की दिक्कतें आ रही हैं।
हादसे वाली जगहों की पहचान और उनका रिव्यू डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमेटियों की प्रोसेस का भी हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक मुंबई शहर और सबअर्बन ज़िले के लिए हर छह महीने में अलग-अलग मीटिंग होती हैं, जो संबंधित डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के तहत होती हैं।
प्रस्तावित कॉन्ट्रैक्ट 18 महीने का है, जिसमें मॉनसून का समय शामिल नहीं है। रोड मार्किंग के लिए डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड 12 महीने और कर्बस्टोन व डिवाइडर पेंटिंग के लिए छह महीने होगा। कॉन्ट्रैक्ट में कीमत का बदलाव 5% तक सीमित रखा गया है। खर्च बीएमसी के रोड और ट्रैफिक डिपार्टमेंट के कैपिटल वर्क्स बजट से होगा, जिसकी फंडिंग 2026-27 और 2027-28 फाइनेंशियल ईयर में करने की योजना है। टेंडर 14 दिसंबर, 2026 तक वैलिड रहेगा।
प्रपोज़ल को अब स्टैंडिंग कमेटी और शहर व उपनगरों की संबंधित इम्प्रूवमेंट कमेटियों की मंज़ूरी का इंतज़ार है, जैसा भी लागू हो। मंज़ूरी मिलने के बाद प्रोजेक्ट लागू किया जा सकता है।
अनुमान से 36% कम बोली ने कीमत और काम की क्वालिटी पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस पार्षद अशरफ़ आज़मी ने पूछा कि क्या बीएमसी का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था, या कम कोटेशन से काम के स्टैंडर्ड पर असर पड़ सकता है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक प्रगति एंटरप्राइजेज को काम मिलने के 15 वर्किंग डेज़ के अंदर लगभग Rs 5.32 करोड़ का अतिरिक्त सिक्योरिटी डिपॉज़िट देना होगा।
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