मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
17:56 IST

योगी बोले: यूपी के कारीगरों को अब अपनी मिट्टी में ही हुनर दिखाने का मौका मिल रहा है

भदोही में इंडिया कार्पेट एक्सपो के गोल्डन जुबली समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारीगरों के पलायन और भदोही के कालीन उद्योग पर बात की।

योगी बोले: यूपी के कारीगरों को अब अपनी मिट्टी में ही हुनर दिखाने का मौका मिल रहा है
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन कारीगरों और हस्तशिल्पियों को कभी रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता था, उन्हें आज उत्तर प्रदेश में ही अपना हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। उनके मुताबिक स्थानीय कामगारों को टेक्नोलॉजी, डिजाइन और बाजार से बेहतर जुड़ाव मिला है और सुरक्षा भी मिली है। आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि भदोही के कालीन ने आज दुनिया के बाजार में अपनी अलग पहचान बना ली है।

मुख्यमंत्री रविवार को संत रविदास नगर, भदोही के कार्पेट एक्सपो मार्ट में इंडिया कार्पेट एक्सपो के गोल्डन जुबली समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। यह एक्सपो 4 से 7 अक्टूबर तक चल रहा है। इसमें 227 से ज्यादा एक्जिबिटर और 65 देशों के 450 से ज्यादा खरीदार शामिल हुए हैं। इन खरीदारों में ब्रिक्स देशों के 106 खरीदार भी हैं।

योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हताशा और निराशा का माहौल था। दंगे, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियाराज की वजह से कारोबार का माहौल नहीं था। कारीगरों को काम नहीं मिलता था और देश-विदेश के खरीदार भी यहां नहीं आते थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में भदोही के कालीन को शामिल किया और कारीगरों को टेक्नोलॉजी, डिजाइन और बाजार से जोड़ा।

आंकड़ों पर आएं तो मुख्यमंत्री के मुताबिक संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से 6,100 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी के मखमली कालीन की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर से 2,500 एमएसएमई यूनिट निर्यात करती हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 10 हजार करोड़ रुपये है। इस उद्योग से पांच लाख से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि जिले में बनने वाले 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत कई देशों में भेजे जाते हैं। भदोही के हाथ से बने कालीन को जीआई टैग भी मिल चुका है। कार्पेट और टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की तकनीकी पढ़ाई, डिजाइनिंग और रंगाई की ट्रेनिंग देने के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कार्पेट टेक्नोलॉजी बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी आवाजाही की सुविधाओं का सीधा फायदा कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में होने के बाद संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। एयरपोर्ट की कार्गो सुविधा से भदोही के कालीन दुनिया भर के बाजारों में आसानी से पहुंच सकेंगे। इसके अलावा वाराणसी से हल्दिया के बीच अंतर्देशीय जलमार्ग की सुविधा है और वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी कार्गो सुविधा उपलब्ध है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे