विदर्भ में बारिश 27 फीसदी कम, मानसून की वापसी शुरू होने को
विदर्भ में इस बार औसत से करीब 27 फीसदी कम बारिश हुई है और मानसून की वापसी अब शुरू होने वाली है।
नागपुर: दक्षिण-पश्चिम मानसून अब लौटने की तैयारी में है और विदर्भ में कम बारिश का असर साफ दिखने लगा है। बारिश की गतिविधि कमजोर है और इलाके में सूखी हवा आ रही है। इसी वजह से उम्मीद है कि अगले 48 घंटे में मानसून महाराष्ट्र से लौटना शुरू कर देगा, जबकि विदर्भ से उसकी वापसी तीन से चार दिन में शुरू हो सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 अक्टूबर को नागपुर जिले में आसमान बादलों से घिरा रहने का अनुमान जताया है। मध्य प्रदेश के ऊपर एक मौसम सिस्टम सक्रिय है। इसकी वजह से विदर्भ के कुछ हिस्सों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। नागपुर समेत ज्यादातर जिलों में मौसम काफी हद तक सूखा रहने की उम्मीद है।
मौसम के जानकारों का अंदाजा है कि मानसून की वापसी करीब 15 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है। विदर्भ में अब तक लंबी अवधि के औसत से करीब 27 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। कई जिलों में यह कमी 40 फीसदी से भी ज्यादा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा कमी अमरावती में 43 फीसदी रही। उसके बाद अकोला में 41 फीसदी और वाशिम में 37 फीसदी की कमी दर्ज हुई। नागपुर और वर्धा में बारिश 34 फीसदी कम रही।
पूरे विदर्भ में सिर्फ गोंदिया ऐसा जिला है जहां बारिश लगभग सामान्य रही। वहां कमी महज 1 फीसदी है।
बारिश की इस कमी से खेती और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। कम बारिश का असर खरीफ की फसलों पर पड़ सकता है। राज्य सरकार ने सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ने पर भी रोक लगा दी है।
महाराष्ट्र के 32 जिलों के 358 तालुकों में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। यह राज्य का लगभग 74 फीसदी हिस्सा है। सरकार ने किसानों, खेत मजदूरों और दूसरे कमजोर तबकों के लिए राहत के उपायों का ऐलान किया है।
मानसून के खत्म होने की ओर बढ़ने के साथ, बारिश की लगातार कमी विदर्भ की खेती और पानी के स्रोतों के लिए चिंता की बात बनी हुई है।