वर्धा: विहिर का अनुदान 27 महीने से अटका, किसान ने दी जान देने की चेतावनी
सोनगाव के किसान प्रवीण चौधरी का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
वर्धा जिले के सोनगाव के किसान प्रवीण चौधरी की सिंचाई विहिर का अनुदान 27 महीने से नहीं मिला है। दो साल से ज्यादा हो गए, पैसा नहीं आया। इससे तंग आकर चौधरी ने प्रशासन की परेशानी से आत्महत्या करने का फैसला कर लिया था। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर फैला तो प्रशासन हरकत में आया और इस मामले पर चर्चा शुरू हुई।
चौधरी ने मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मंजूर हुई विहिर का काम पूरा कर लिया था। इसके बावजूद 27 महीने से उनका हक का अनुदान बैंक खाते में जमा नहीं हुआ। स्रोत के मुताबिक अनुदान वक्त पर न मिलने से उन्हें विहिर खोदने के लिए कर्ज लेना पड़ा, जिससे कर्ज का बोझ बढ़ गया। पंचायत समिति के ढीले कामकाज से उन्हें मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। इसी से तंग आकर उन्होंने वीडियो बनाकर आत्महत्या की चेतावनी दी।
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने फौरन बैठक बुलाई। बताया गया है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रात में ही चौधरी से मिलने पहुंचे। उसके बाद अटका हुआ फंड जल्द मंजूर करने के लिए कदम उठाए गए हैं।
चौधरी ने 22 सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय को पत्र दिया था। उसमें लिखा था कि सात दिन में सिंचाई विहिर का पैसा नहीं आया तो वे विहिर में जान दे देंगे।
वर्धा जिले के गट विकास अधिकारी प्रफुल लोखंडे ने बताया कि यह विहिर मार्च 24 में मंजूर हुई थी। अप्रैल में उसका लेआउट निकाला गया और रेगुलर मस्टर सिलसिलेवार तरीके से निकाला गया। फरवरी में कुशल का बिल जमा करने के बाद वह बिल 24 मार्च 2025 को सौंपा गया। दिसंबर में फंड नहीं आया और उसके बाद 78 विहिरों का फंड आना बाकी था। सोनेगाव और इसापुर के चार किसानों का फंड बाकी था, जिनमें प्रवीण चौधरी का नाम भी था।
चौधरी का कहना है कि उन्हें रोजगार गारंटी की विहिर 2024 में मिली थी। उन्होंने पालकमंत्री मनोज भोयार के जनता दरबार में पैसे के लिए अर्जी दी थी। 14 अगस्त को राजस्व मंत्री बावन कुळे गांव आए तो चौधरी ने उनसे पूछा कि किसानों की योजना का पैसा देना ही नहीं है तो योजना बनाते क्यों हैं। उन्होंने कहा कि पैसा नहीं मिला तो वे आत्महत्या का फैसला लेंगे। चौधरी के मुताबिक तब राजस्व मंत्री बावन कुळे ने पैसे देने का आदेश दिया और जिलाधिकारी कार्यालय से एक महीने के भीतर पैसा देने का आश्वासन मिला है।
मनरेगा केंद्र सरकार की योजना है, जो ग्रामीण इलाके के परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन के रोजगार की गारंटी देती है। इसमें हर परिवार के वयस्क को साल में कम से कम 100 दिन अकुशल शारीरिक काम की गारंटी मिलती है। 18 साल से ऊपर की उम्र का, मेहनत का काम कर सकने वाला ग्रामीण भारतीय नागरिक इसके लिए पात्र है।
योजना ग्राम पंचायत के जरिए लागू होती है, इसलिए मजदूरों को अपने गांव या आसपास काम मिलता है। पात्र मजदूरों को ग्राम पंचायत से जॉब कार्ड मिलता है। काम के बाद 15 दिन के भीतर मजदूरी बैंक या पोस्ट खाते में जमा की जाती है। योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों में गरीबी और बेरोजगारी घटाना, लोगों का शहर की ओर पलायन रोकना और गांव में जल संरक्षण, सड़क, पौधरोपण और वनीकरण जैसे काम खड़े करना है।