मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

वर्धा की अंगणवाडियों में बच्चे बने "बाल सेविका", एक दिन संभाला अंगणवाडी ताई का काम

एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना के तहत वर्धा जिले के अंगणवाडी केंद्रों में छोटे बच्चों ने अंगणवाडी सेविका की भूमिका निभाई।

वर्धा की अंगणवाडियों में बच्चे बने "बाल सेविका", एक दिन संभाला अंगणवाडी ताई का काम
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वर्धा जिले के अंगणवाडी केंद्रों में इन दिनों एक अनोखा और नया उपक्रम चला। एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना के तहत 'आइए बाल सेविका बनें, अंगणवाडी ताई का काम जानें' नाम से यह उपक्रम चलाया गया। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हुए इस आयोजन में छोटे बच्चों ने अपनी अंगणवाडी खुद संभाली।

उपक्रम की सोच यह थी कि बच्चे एक दिन अंगणवाडी सेविका बनकर देखें और अंगणवाडी ताई का काम करीब से जानें। इसी सोच से छोटे-छोटे बच्चों ने सचमुच 'बाल सेविका' की भूमिका निभाई और अंगणवाडी के रोज के कामकाज का अनुभव लिया। बच्चों के सर्वांगीण विकास को खुशी भरे अनुभव से जोड़ना इसका मकसद था।

बाल सेविका बने बच्चों ने अपनी उम्र के हिसाब से अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने खेल-खेल में सिखाया, बच्चों की देखभाल की और सफाई का महत्त्व बताया। पूरक आहार की जानकारी ली, सेहत और पोषण को लेकर जागरूकता फैलाई और अभिभावकों व समुदाय से बातचीत भी की। इन सब कामों से बच्चों ने अंगणवाडी सेविका के काम को नजदीक से समझा।

अंगणवाडी का रोज का कामकाज, बच्चों का पोषण, पूर्वप्राथमिक शिक्षा, सेहत, सफाई और सर्वांगीण विकास, इन सबमें अंगणवाडी सेविकाओं की भूमिका कितनी अहम है, यह बात बच्चों को खुद करके समझ में आई।

छोटे बाल सेविकाओं ने बड़ी जिम्मेदारी निभाई। इस उपक्रम में बच्चों ने एक-दूसरे की मदद करने, समूह में काम करने, दूसरों का ख्याल रखने और सौंपी गई जिम्मेदारी पूरी करने का अनुभव लिया। "मैं भी कर सकता हूं, कर सकती हूं" यह आत्मविश्वास जगाने के साथ-साथ नेतृत्व, सहयोग, संवेदनशीलता और सेवाभाव जैसे मूल्य भी बच्चों में बोए गए।

अंगणवाडी केंद्र सिर्फ पोषण आहार और पूर्वप्राथमिक शिक्षा देने की जगह नहीं है। यह बच्चों के व्यक्तित्व के विकास और सामाजिक समझ गढ़ने की पहली पाठशाला है। इस उपक्रम के जरिए बच्चों के मन में जिम्मेदारी उठाने, नेतृत्व करने और दूसरों की परवाह करने की भावना जगाने की कोशिश की गई।

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