उत्तर नागपुर पार्क आरक्षण मामला, हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ नागरिकों की रिव्यू अर्जी
उत्तर नागपुर की 37.38 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित पार्क का आरक्षण खत्म करने वाले हाई कोर्ट के फैसले को 10 नागरिकों ने चुनौती दी है।
उत्तर नागपुर में एक बड़ी जमीन पर बनने वाले पार्क और गार्डन को लेकर कानूनी लड़ाई फिर छिड़ गई है। मामला करीब 37.38 एकड़ जमीन के आरक्षण का है, जिसे लेकर अब क्षेत्र के 10 नागरिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
हुआ यह कि हाई कोर्ट ने 10 दिसंबर 2025 को एक फैसले में इस जमीन के आरक्षण को समाप्त मान लिया था। इसी फैसले के खिलाफ अब शरद तुकाराम मेश्राम समेत 10 नागरिकों ने अदालत में थर्ड पार्टी रिव्यू आवेदन दाखिल करने की इजाजत मांगी है।
इन नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ किसी निजी जमीन का झगड़ा नहीं है। उनके मुताबिक इसका सीधा नाता उत्तर नागपुर के लोगों, यहां के पर्यावरण और शहर की आगे की योजना से है, इसलिए इसे गंभीर सार्वजनिक मुद्दा माना जाना चाहिए।
आवेदकों की शिकायत है कि जिस जमीन को शहर की विकास योजना में पार्क और गार्डन के लिए रखा गया था, उसका आरक्षण हटते ही हजारों लोगों के लिए तय हरित क्षेत्र खतरे में पड़ गया है।
दरअसल हाई कोर्ट में सुरेशचंद्र सूरी एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र शासन एवं अन्य नाम से एक केस पहले से चल रहा है। नए आवेदकों का कहना है कि वे इस मूल याचिका में पक्षकार नहीं थे, इसी वजह से 10 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाए जाने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला।
अब यह नागरिक खुद को इस फैसले से सीधे प्रभावित बता रहे हैं और अदालत से समीक्षा याचिका दाखिल करने की अनुमति मांग रहे हैं। इनके मुताबिक विवाद वाली जमीन मौजा नारी में है और इसमें सर्वे नंबर 202, 203/1, 164, 165, 211-1, 168, 169, 170, 171/1, 172/1 और 175/1 शामिल हैं।
आवेदन में यह भी बताया गया है कि उत्तर नागपुर की कुल करीब 37.38 एकड़ जमीन शहर की विकास योजना में पार्क और गार्डन के लिए आरक्षित थी। इलाके के लोग लंबे समय से इस उम्मीद में थे कि इतनी बड़ी जमीन पर एक सार्वजनिक पार्क बनेगा, जिससे उत्तर नागपुर को एक बड़ा हरित क्षेत्र मिल सके।
आवेदकों ने अदालत को बताया है कि इस जमीन का पार्क और गार्डन के लिए आरक्षण खत्म होने का सीधा असर वहां के नागरिकों के हितों और इलाके की पर्यावरणीय जरूरतों पर पड़ सकता है।