उमेश यादव विदर्भ छोड़कर दूसरे राज्य से खेलने की तैयारी में
विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन से एनओसी मांगी, कहा दूसरे राज्यों से ऑफर मिले हैं
नागपुर: विदर्भ की तेज गेंदबाजी का सबसे बड़ा नाम और भारतीय क्रिकेट में जाना-पहचाना चेहरा उमेश यादव अब राज्य टीम से नाता तोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में नई चुनौती तलाशने का फैसला कर लिया है।
अपनी रफ्तार की वजह से 'विदर्भ एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर हुए इस अनुभवी तेज गेंदबाज ने आने वाले घरेलू सीजन से पहले विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन (वीसीए) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी मांगी है, ताकि वे किसी और राज्य की टीम से जुड़ सकें।
25 अक्टूबर को 39 साल के होने जा रहे यादव फिलहाल भारतीय टीम में जगह बनाने की दौड़ से बाहर हैं। वीसीए के सचिव संजय बडकस के मुताबिक, यादव ने एसोसिएशन को बताया कि उन्हें दूसरे राज्यों की टीमों से ऑफर मिले हैं और वे आगे बढ़ना चाहते हैं।
बडकस ने कहा, "हां, उन्होंने हमसे एनओसी के लिए संपर्क किया और बताया कि उन्हें दूसरे राज्यों की एसोसिएशन से ऑफर मिले हैं और वे इस सीजन से किसी और टीम के लिए खेलना चाहते हैं। उन्होंने किसी खास एसोसिएशन का नाम नहीं बताया।"
यादव का इस तरह विदर्भ छोड़ना टीम के लिए एक बड़े अध्याय का अंत होगा, लेकिन बडकस ने यह भी कहा कि विदर्भ के पास तेज गेंदबाजों का मजबूत जखीरा है जिन्हें इस मौके का फायदा मिल सकता है।
यादव ने 2008-09 सीजन में विदर्भ के लिए फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था और तब से वे विदर्भ के घरेलू क्रिकेट में एक ताकतवर टीम बनकर उभरने की कहानी का अहम हिस्सा रहे हैं। 2017-18 और 2018-19 में विदर्भ की लगातार दो रणजी ट्रॉफी जीत में उनका बड़ा योगदान रहा।
उनकी असली रफ्तार का फायदा यह होता था कि विरोधी बल्लेबाज अगर एक छोर से उनका सामना कर भी लें, तो दूसरे छोर के गेंदबाजों को विकेट निकालने का मौका मिल ही जाता था।
उनकी सबसे यादगार परफॉर्मेंस 2018-19 रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में वायनाड में केरल के खिलाफ रही, जहां उन्होंने अपने फर्स्ट क्लास करियर के बेस्ट आंकड़े 7-48 और 5-31 निकालकर विदर्भ को लगभग अकेले दम पर फाइनल में पहुंचा दिया था।
नवंबर 2015 में राजस्थान के खिलाफ चार विकेट लेते हुए उन्होंने घरेलू क्रिकेट में हैट्रिक भी ली थी, जो उनकी मैच पलटने की काबिलियत दिखाती है।
बल्ले से भी यादव कम नहीं थे। अक्टूबर 2015 में ओडिशा के खिलाफ उन्होंने अपना पहला फर्स्ट क्लास शतक जड़ा और 119 गेंदों पर 128 रन बनाए। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में लिस्ट ए क्रिकेट और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में घरेलू टी20 क्रिकेट में भी योगदान दिया।
विदर्भ के पहले टेस्ट खिलाड़ी होने का गौरव भी यादव के नाम है। 6 नवंबर 2011 को दिल्ली में वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करके वे भारत के लिए टेस्ट खेलने वाले विदर्भ के पहले खिलाड़ी बने थे।
इसके बाद उन्होंने सभी फॉर्मेट में भारत के प्रमुख तेज गेंदबाजों में अपनी जगह पक्की की। उन्होंने 57 टेस्ट खेलकर 170 विकेट लिए, जिसमें तीन बार पांच विकेट और एक बार मैच में दस विकेट का कारनामा शामिल है। उन्होंने भारत के लिए 75 वनडे और नौ टी20 मैच भी खेले।
उनका आखिरी टेस्ट जून 2023 में द ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ था। उसके बाद से वे टीम इंडिया के टेस्ट सेटअप से बाहर हैं।
अब एनओसी मांगने के फैसले के साथ यादव का विदर्भ से जुड़ाव नए मोड़ पर पहुंच गया है, और आगे चलकर यह अनुभवी तेज गेंदबाज घरेलू क्रिकेट में किसी और राज्य की जर्सी पहनता नजर आ सकता है।