उमेश यादव ने विदर्भ छोड़ा, 17 साल बाद पंजाब के लिए साइन किया करार
भारत के तेज गेंदबाज उमेश यादव अगले घरेलू सीजन में पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के लिए खेलेंगे।
नागपुर: भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज उमेश यादव ने अपने घरेलू करियर का नया दौर शुरू कर दिया है। करीब 17 साल तक विदर्भ के साथ रहने के बाद उन्होंने आने वाले सीजन के लिए पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) के साथ करार किया है।
उमेश जल्द ही 39 साल के होने वाले हैं। बुधवार को उन्होंने बताया कि पंजाब के साथ उनका कॉन्ट्रैक्ट हो गया है। उनके मुताबिक यह फैसला इसलिए लिया गया कि वे घरेलू क्रिकेट में मजबूत टीम के साथ रहना चाहते थे, किसी "माइनर" टीम में जाना उन्हें मंजूर नहीं था।
उमेश ने कहा, "मैंने पंजाब के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है और PCA मैनेजमेंट का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे अपनी टीम से खेलने का मौका दिया।" उन्होंने इस बात के लिए भी एसोसिएशन का शुक्रिया अदा किया कि PCA के 34 साल के इतिहास में वे पहले प्रोफेशनल क्रिकेटर हैं जिन्हें टीम में लिया गया है।
विदर्भ छोड़ने के बाद की बात बताते हुए उमेश ने कहा, "मैं ऐसी बड़ी टीम की तलाश में था जो घरेलू सर्किट में अच्छा कर रही हो। मैं विदर्भ जैसी अच्छी टीम से खेल रहा था, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन मेरे विदर्भ छोड़ने के बाद VCA के गलियारों में चर्चा थी कि उमेश को बस किसी छोटी टीम में मौका मिलेगा, शायद नॉर्थईस्ट की किसी टीम में। मैंने तय किया कि ऐसी टीम से जुड़ूंगा जो मजबूत है और अच्छा कर रही है।"
उमेश के नाम 124 फर्स्ट क्लास मैच और 380 विकेट दर्ज हैं। उनका कहना है कि उनमें अभी काफी कुछ बाकी है। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि मुझमें कितना क्रिकेट बचा है और मैं पंजाब के लिए अपना 100 परसेंट दूंगा।"
उमेश ने विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन (VCA) से अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की। खास तौर पर पैर की उस चोट के बाद के बर्ताव को लेकर, जिसमें सर्जरी करानी पड़ी थी। उन्होंने कहा, "जब मैं चोटिल हुआ तो एसोसिएशन ने मेरी अनदेखी की। ठीक होने के बाद खुद को साबित करने का कोई मौका नहीं दिया। पिछले सीजन में न मुझे वनडे में चुना गया, न किसी और फॉर्मेट में।"
उमेश के मुताबिक सर्जरी के बाद लय वापस पाने के लिए उन्हें वक्त चाहिए था। कम मैच खेलने का मतलब यह नहीं कि करियर खत्म होने को है, यह बात उन्होंने सिरे से खारिज की। उन्होंने कहा, "मैं सुपरमैन नहीं हूं कि लौटते ही झोली भरकर विकेट ले आऊं। मैंने दो रणजी मैच खेले, उनमें से एक में मैंने अच्छा किया। इसका मतलब यह नहीं कि मैं खत्म हो गया।"
उमेश का यह भी दावा है कि कोचिंग और सिलेक्शन सेटअप ने जो फैसले लिए, उनसे पहले एसोसिएशन में से किसी ने उनके भविष्य पर उनसे बात नहीं की। उन्होंने कहा, "ऐसा माहौल मेरे लिए ठीक नहीं था, मैं उसमें सहज नहीं था। किसी ने बैठकर मुझसे बात नहीं की। इसीलिए मैंने ऐसी टीम में जाने का फैसला किया जो ज्यादा adoptive है।"
पंजाब में उमेश से बड़ी जिम्मेदारी की उम्मीद है। टीम के मुख्य तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह और गुरनूर बरार के घरेलू सीजन के बड़े हिस्से में भारत की ड्यूटी पर रहने की संभावना है। उमेश ने कहा कि पंजाब से जुड़ते वक्त उन्हें यह हालात पता थे और वे युवा गेंदबाजी आक्रमण को अपने साथ लेकर चलने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा, "पंजाब ऐसा राज्य है जहां क्रिकेटर कामयाबी के भूखे हैं। मुझे पता था कि अर्शदीप और गुरनूर भारत की ड्यूटी पर होंगे और पूरे घरेलू सीजन में नहीं मिलेंगे। तो मेरा काम होगा कि युवा गेंदबाजी यूनिट को साथ लेकर चलूं और अपना अंतरराष्ट्रीय अनुभव टीम से साझा करूं।"
उमेश भारत के लिए 57 टेस्ट और 75 वनडे खेल चुके हैं और टेस्ट में 170 विकेट ले चुके हैं। उनके आने से PCA के लिए भी बड़ा बदलाव हुआ है, क्योंकि एसोसिएशन आम तौर पर अपने ही सिस्टम के खिलाड़ियों पर भरोसा करती आई है।
उमेश ने कहा, "गर्व महसूस करने से ज्यादा मैं PCA का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे मौका दिया। मैंने उनसे बहुत देर से संपर्क किया था, क्योंकि कई दूसरे राज्य मुझसे बात कर रहे थे। इतने कम समय में मौका देने के लिए मैं PCA का आभारी हूं।" उमेश 25 अक्टूबर को 39 साल के हो जाएंगे।