टीनएज बच्चे गुस्से में मां को उल्टा जवाब देते हैं? पेरेंटिंग एक्सपर्ट की ये 5 बातें समझें
14 से 19 साल की उम्र के बच्चे अक्सर गुस्से में मां पर चिल्लाते हैं। पेरेंटिंग एक्सपर्ट ने बताया कि इस उम्र में बच्चों और पेरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
घर में अगर 14 से 19 साल की उम्र का टीनएज बच्चा है, या आप खुद इसी उम्र से गुजर रहे हैं, तो एक बात आम है - इस उम्र में बच्चों को अक्सर लगता है कि उन्हें कोई समझता ही नहीं। इसी निराशा में वे अपने पेरेंट्स को, खासकर मां को, गुस्से में उल्टा जवाब दे बैठते हैं। इसी मुद्दे पर इंस्टाग्राम के एक जाने-माने पेरेंटिंग चैनल maonduty पर एक वीडियो शेयर हुआ है, जिसमें टीनएज बच्चों के लिए एक बहुत प्यारा और गहरा मैसेज दिया गया है। अगर आप भी कभी गुस्से में मां को ताने मारते हैं, तो अगली बार ऐसा करने से पहले ये 5 बातें जरूर याद रखें।
पेरेंटिंग एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे पहली बात यह है कि पेरेंट्स को हुकूमशाह नहीं बल्कि गाइड बनना चाहिए। वीडियो की शुरुआत में ही पेरेंट्स के लिए एक बहुत काम की सलाह दी गई है। एक्सपर्ट कहते हैं कि आपके बच्चे अब बड़े होने की राह पर हैं। वे अपनी जिंदगी में कई बदलावों से जूझ रहे हैं और कई बार उन्हें लगता है कि आप उनकी मर्जी के खिलाफ हैं। ऐसे में उन पर लगातार चिल्लाते रहना या उन्हें बांधकर रखने वाला हुकूमशाह बनना जरूरी नहीं, बल्कि हर पेरेंट को एक प्यार से रास्ता दिखाने वाला गाइड बनना चाहिए। साथ ही, बच्चों को भी मां को उल्टा जवाब देने से पहले इन 5 बातों पर जरूर सोचना चाहिए।
दूसरी बात, बच्चों को यह भरोसा रखना चाहिए कि मां उनके खिलाफ नहीं है। टीनएज में कई बार मां के ताने या रोक-टोक जरूरत से ज्यादा लग सकते हैं। उस वक्त बच्चे को लग सकता है कि मां उसकी आजादी खत्म करना चाहती है। लेकिन हर रोक-टोक के पीछे कंट्रोल की सोच हो, यह जरूरी नहीं। एक्सपर्ट बच्चों से कहते हैं कि अगर मां गुस्से में जोर से बोल दे या उसका बोलने का तरीका सही न लगे, तो फौरन यह मत समझ लो कि वह तुम्हारे खिलाफ है। कई बार पेरेंट्स जो कहते हैं वह सही होता है, बस कहने का तरीका गलत हो सकता है। इसलिए अगली बार गुस्से में जवाब देने से पहले खुद से पूछें - क्या मेरी मां को सच में मेरी बातें बुरी लगती हैं? यह सवाल कई बार पूरी बहस वहीं रोक सकता है।
तीसरी बात, हर रोक-टोक का मतलब कंट्रोल नहीं होता। फोन मत चलाओ, रात को देर तक बाहर मत रहो, जैसी बातें कभी-कभी टीनएज बच्चों को कंट्रोल जैसी लग सकती हैं। लेकिन पेरेंट्स ज्यादातर बच्चे को किसी जल्दबाजी वाले फैसले से बचाना चाहते हैं, क्योंकि इस उम्र में कई फैसले भावनाओं के असर में लिए जा सकते हैं। दोस्त, रिश्ते, करियर, सोशल मीडिया या किसी और दबाव में बच्चा जल्दबाजी में कुछ कर सकता है। ऐसे में पेरेंट्स की फिक्र को सिर्फ आप मुझे कंट्रोल करते हो कहना सही नहीं। पेरेंट्स का हर बात ठीक से न समझाना भी मायने रखता है। गाइड करना और हर फैसला खुद ले लेना, दोनों अलग बातें हैं। इसलिए पेरेंट्स और बच्चों दोनों को एक-दूसरे की बात समझने की कोशिश करनी चाहिए।
चौथी बात, कड़े शब्द मां के मन को गहरा चोट पहुंचाते हैं। टीनएज बच्चों का कभी-कभी अकेले रहने का मन करना आम बात है, उन्हें स्पेस चाहिए होता है। लेकिन जब कोई गुस्से में बच्चा अपनी मां से कहता है मेरे पास मत रहो, तो बच्चे के लिए यह बस पल भर का गुस्सा हो सकता है, मगर मां के मन में यह काफी देर तक चुभता रह सकता है। उसे लगने लगता है कि आखिर मुझसे क्या गलती हुई। इसलिए बच्चों को मां के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए।
पांचवीं और आखिरी बात, गुस्से की असली वजह मां नहीं, आपका खुद का तनाव है। एक्सपर्ट के मुताबिक टीनएज में एक साथ कई चीजें चल रही होती हैं - स्कूल का प्रेशर, एग्जाम, करियर, दोस्ती और रिश्ते। बच्चे को खुद भी नहीं पता चलता कि वह इतना परेशान क्यों है। ऐसे में गुस्सा सबसे करीबी इंसान पर निकल जाता है, और ज्यादातर घरों में वह इंसान मां होती है। इसलिए अगली बार जब किसी छोटी बात पर मां से झगड़ा हो, तो खुद से पूछें - क्या मैं सच में मां पर गुस्सा हूं, या किसी और दबाव में हूं? पेरेंट्स को भी चाहिए कि इस उम्र के गुस्से को पर्सनल अटैक न मानकर यह समझने की कोशिश करें कि इसके पीछे कोई और वजह तो नहीं। एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि वक्त बहुत तेजी से निकल जाता है - स्कूल से कॉलेज, फिर नौकरी तक, धीरे-धीरे मां के साथ बिताया वक्त कम होता जाता है। एक दिन जब जिंदगी सेट हो जाएगी, तब एहसास होगा कि मां सही थी। मां की डांट में भी एक छुपा हुआ प्यार होता है, उसे समझने के लिए बस थोड़ी परिपक्वता चाहिए, और यह हर बच्चे में अलग-अलग वक्त पर आती है।