मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

सूखे के बीच भव्य गरबा-डांडिया रद्द हों, खर्च किसानों पर लगे: मराठी एकीकरण समिति

मराठी एकीकरण समिति ने सूखे को देखते हुए बड़े गरबा-डांडिया रद्द करने या सादगी से करने और बचा पैसा किसानों व गांवों में लगाने की मांग की है।

सूखे के बीच भव्य गरबा-डांडिया रद्द हों, खर्च किसानों पर लगे: मराठी एकीकरण समिति
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। गांवों में पानी की किल्लत है और खेती के संकट से किसान परेशानी में हैं। इसी को देखते हुए शहरों में होने वाले भव्य गरबा-डांडिया और नवरात्रि के आयोजनों पर दोबारा सोचने की मांग उठी है। यह मांग मराठी एकीकरण समिति ने रखी है।

समिति का कहना है कि उत्सव पर होने वाला बड़ा खर्च टाला जाए और वह पैसा पानी की सप्लाई, गांवों की सुविधाओं और जरूरतमंद किसानों की मदद में लगाया जाए।

समिति ने सवाल उठाया है कि गांवों में किसान पानी के लिए जूझ रहे हैं, तो शहरों में नवरात्रि के नाम पर भारी रकम खर्च करके बड़े कार्यक्रम करना कितना ठीक है। समिति के मुताबिक गरबा-डांडिया के कार्यक्रमों में बड़े मैदान, आकर्षक रोशनी, साउंड सिस्टम, कलाकारों और दूसरे इंतजामों पर काफी पैसा लगता है। इस साल राज्य में पानी की कमी को देखते हुए ऐसे महंगे आयोजनों पर लगाम लगाने की जरूरत है, यह समिति का कहना है।

मराठी एकीकरण समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने मांग की है कि इस साल के बड़े गरबा-डांडिया कार्यक्रम रद्द किए जाएं, या फिर बिल्कुल सादगी से किए जाएं। उन्होंने कहा है कि उत्सव पर खर्च होने वाला पैसा गांवों में पानी की सप्लाई, पीने के पानी की सुविधाओं और किसानों की मदद में लगे, तो उसका सीधा फायदा संकट झेल रहे इलाकों को मिल सकता है। इसलिए इस बार उत्सव सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए मनाने की अपील की गई है।

समिति ने राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संस्थाओं और नवरात्रि मंडलों से भी अपील की है कि वे राज्य के ग्रामीण इलाकों के हालात को समझें और संवेदनशीलता से फैसला लें। सरकार और प्रशासन से भी मांग की गई है कि बड़े गरबा-डांडिया कार्यक्रमों को इजाजत देते समय स्थानीय पानी की स्थिति और सूखे जैसे हालात का ध्यान रखें।

समिति का कहना है कि उत्सव पर पूरी तरह रोक लगाने की जरूरत नहीं है। जरूरत के हिसाब से सादगी से आयोजन किया जाए और बचा हुआ पैसा समाज के कामों में लगाया जाए, यह रास्ता अपनाया जा सकता है। समिति को उम्मीद है कि इस साल का नवरात्रि उत्सव सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों और गांवों की मदद का जरिया बने।

यह मांग मीरा-भायंदर से सामने आई है।

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