सुझुकी का भारत के लिए बड़ा प्लान, 2030 तक 40 लाख गाड़ियां बनाने का लक्ष्य, पूरी डिटेल यहां पढ़ें
जापान की गाड़ी बनाने वाली कंपनी सुझुकी भारत में अपनी उत्पादन क्षमता बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य है कि आर्थिक वर्ष 2030 तक भारत में हर साल करीब 40 लाख गाड़ियां बनाई जाएं। अभी जो उत्पादन क्षमता है, उसके मुकाबले यह बढ़ोतरी करीब 38 फीसदी होगी। इससे साफ है कि भारत सुझुकी के लिए अब सिर्फ गाड़ियां बनाने की जगह नहीं रह गया, बल्कि दुनिया भर में एक्सपोर्ट करने के लिए भी एक बड़ा ठिकाना बनता जा रहा है।
अभी मारुती सुझुकी की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 29 लाख गाड़ियों की है। कंपनी की पहले की प्लानिंग के मुताबिक यह क्षमता आर्थिक वर्ष 2027 के अंत तक 29 लाख और आर्थिक वर्ष 2031 के अंत तक 36.5 लाख यूनिट तक पहुंचनी थी। लेकिन बढ़ती डिमांड और एक्सपोर्ट के मौकों को देखते हुए सुझुकी ने अब अपना टार्गेट बढ़ाकर 40 लाख गाड़ियों का कर दिया है, यानी कंपनी अपने पुराने प्लान से कहीं आगे जाकर सोच रही है।
पिछले साल छोटी गाड़ियों पर जीएसटी की दरों में बदलाव के बाद गाड़ियों की मांग में जबरदस्त उछाल आया था। इसकी वजह से मारुती सुझुकी को कुछ समय के लिए अपनी उत्पादन क्षमता से ज्यादा बुकिंग का सामना करना पड़ा। मांग को पूरा करने के लिए कंपनी ने कुछ समय तक रविवार और छुट्टी वाले दिन भी अपने प्लांट चालू रखे थे। नई क्षमता से आगे चलकर गाड़ियों के उत्पादन और डिलीवरी की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सुझुकी का एक और बड़ा लक्ष्य यह है कि नई गाड़ी को तैयार करने में जो समय लगता है, उसे 2030 तक आधा कर दिया जाए। इसके लिए कंपनी डिजाइन, उत्पादन, क्वालिटी और खरीद, इन सभी प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाएगी। साथ ही डिजिटल इंजीनियरिंग और एक जैसे मॉड्यूल के इस्तेमाल को भी बढ़ाया जाएगा, ताकि नई गाड़ी बनाने की पूरी प्रक्रिया तेज हो सके।
इस बीच सुझुकी कॉम्पैक्ट गाड़ियों के लिए 'REEV Light' नाम की रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है। इस तकनीक में गाड़ी के पहिए इलेक्ट्रिक मोटर से चलेंगे, जबकि एक छोटा पेट्रोल इंजन जनरेटर की तरह काम करते हुए बैटरी को चार्ज करता रहेगा। इसका मकसद यह है कि बड़ी बैटरी लगाए बिना भी गाड़ी को ज्यादा ड्राइविंग रेंज दी जा सके। भारत के लिए आगे चलकर यह तकनीक काफी अहम साबित हो सकती है।