स्पेन में किराया और बेदखली से गुस्सा, माद्रिद समेत कई शहरों में सड़कों पर उतरे लोग
माद्रिद समेत स्पेन के कई शहरों में किराये, घरों की कमी और बेदखली के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।
स्पेन में बढ़ते घर किराये, घरों की कमी और बेदखली के मामलों से लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। माद्रिद समेत देश के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे हैं और सरकार से फौरन कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन करने वालों की तीन मुख्य मांगें हैं। पहली, सस्ते और किफायती घर उपलब्ध कराए जाएं। दूसरी, बढ़ते किराये पर काबू रखा जाए। तीसरी, किरायेदारों को ज़्यादा सुरक्षा दी जाए।
घरों की कीमतें और किराये के रेट बढ़ रहे हैं, इसलिए आम लोगों के लिए अपनी कमाई में घर का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी वजह से यह मांग ज़ोर पकड़ रही है कि सरकार हाउसिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर दखल दे और लोगों को राहत पहुंचाए।
स्पेन के बड़े शहरों में घरों की मांग बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध घरों की संख्या उसके मुकाबले कम है। नतीजा यह है कि किराये में भारी उछाल आया है। खासकर माद्रिद और बार्सिलोना जैसे शहरों में आम आदमी के लिए किफायती घर ढूंढना चुनौती बन गया है।
तनख्वाह का बड़ा हिस्सा किराये में चला जाता है, जिससे कई परिवारों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ी हैं। इसीलिए आंदोलन में किराया नियंत्रण और सस्ते घरों की संख्या बढ़ाने की बात उठाई जा रही है।
किराया भरना मुश्किल होने से कई किरायेदारों पर घर खोने का खतरा मंडरा रहा है। कुछ जगहों पर बुज़ुर्गों और बरसों से एक ही घर में रह रहे परिवारों की बेदखली के मामलों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। इसी पृष्ठभूमि में प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सरकार किरायेदारों के हक़ की हिफ़ाज़त करे। पुएर्ता डेल सोल जैसी अहम जगहों पर आंदोलन करके सरकार पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सस्ते घरों का निर्माण बढ़ाने, किराये के रेट पर कंट्रोल लाने और बेदखली के मामलों में किरायेदारों को ज़्यादा कानूनी सुरक्षा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस हाउसिंग संकट का असर सिर्फ कम आमदनी वालों पर नहीं, बल्कि नौजवानों और मध्यम वर्ग के परिवारों पर भी पड़ रहा है। इसलिए आंदोलनकारियों के मुताबिक लंबे समय की हाउसिंग नीति और फौरी मदद, दोनों की ज़रूरत है।