स्पेन के लेइदा शहर में चेहरा ढकने पर रोक, बुर्का-नकाब पर 750 यूरो तक जुर्माना
स्पेन के लेइदा शहर में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर बैन लगाया गया है, जिसके उल्लंघन पर मोटा जुर्माना लगेगा।
दुनिया भर में इन दिनों एक खास तरह की विचारधारा वाले लोग सत्ता में हैं, या यूं कहें कि समाज खुद ही बदल गया है। अगर गौर से देखा जाए तो दुनिया में जो भी बदलाव हो रहा है, वो एक तरह से नैसर्गिक ही है, क्योंकि इंसान और प्रकृति में बदलाव आना एक अनलिखा नियम है। समाज हमेशा एक साथ वैचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ सकता, वो एक ही समय में जितना आगे रहता है, उतना ही पीछे भी रहता है। इसी वजह से जाति, धर्म, रंग और स्थलांतर पर अलग-अलग राय सामने आती रहती हैं। इसी सिलसिले में स्पेन के लेइदा शहर में एक नया फैसला लिया गया है।
लेइदा शहर में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले पोशाक पहनने पर रोक लगा दी गई है। नई नागरिक नियमावली के मुताबिक बुर्का और नकाब जैसे पोशाक जिनसे चेहरा पूरी तरह ढक जाता है, उन पर कार्रवाई हो सकती है। इस फैसले के बाद स्पेन में धार्मिक आजादी, सार्वजनिक जीवन के नियम और महिलाओं के अधिकार जैसे मुद्दों पर फिर से बहस शुरू हो गई है।
लेइदा नगरपालिका ने जो नई नियमावली मंजूर की है, उसमें सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले किसी भी कपड़े या पोशाक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई है। नियम में सीधे तौर पर बुर्का या नकाब का नाम नहीं लिया गया, लेकिन चेहरा पूरी तरह ढकने वाले पोशाकों की लिस्ट में ये दोनों आ जाते हैं। इस नियम को तोड़ने पर 400 से 750 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि धार्मिक स्थलों और कुछ सामाजिक प्रथाओं या मूलभूत अधिकारों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को इससे बाहर रखा गया है।
लेइदा में इस तरह की पाबंदी लगाने की कोशिश यह पहली बार नहीं है। साल 2010 में भी इस शहर ने सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले पोशाकों पर रोक लगाई थी। लेकिन 2013 में स्पेन की सर्वोच्च अदालत ने वो नियम रद्द कर दिया था। अदालत ने तब यह सवाल उठाया था कि क्या स्थानीय प्रशासन को धार्मिक आजादी जैसे मूलभूत अधिकारों पर पाबंदी लगाने का हक है। इस वजह से इस बार की नई नियमावली का कानूनी तौर पर लागू होना भी अब चर्चा का विषय बन गया है।
लेइदा का यह फैसला उस वक्त आया है जब यूरोप के कुछ देशों में बुर्का और नकाब से जुड़े नियमों को और सख्त किया जा रहा है। सार्वजनिक सुरक्षा, सामाजिक बातचीत, महिलाओं के अधिकार और धार्मिक आजादी जैसे मुद्दों पर इस विषय पर अलग-अलग राय सामने आती रही हैं। लेइदा में मंजूर हुए इस नियम ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है। नगरपालिका का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक जीवन में सामाजिक बातचीत और नागरिकों के साथ रहने की भावना को बढ़ाने के लिए लिया गया है, जबकि इसका विरोध करने वाले गुटों ने धार्मिक आजादी और इस नियम के सही तरीके से लागू होने पर सवाल उठाए हैं।