सातारा तालुका में १२१ गांवों ने गणेशोत्सव को दिया डॉल्बीमुक्त बनाने का फैसला
सातारा तालुका पुलिस की पहल पर १५३ में से १२१ गांवों ने डॉल्बीमुक्त गणेशोत्सव मनाने का फैसला लिया, वहीं ९५ गांवों ने एक गांव, एक गणपति का उपक्रम अपनाया।
गणेशोत्सव का नाम आते ही ढोल-ताशों की गूंज, रोशनी और उत्साह का माहौल सामने आता है। लेकिन इस बार सातारा तालुका पुलिस ने इस उत्साह में अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण का ख्याल जोड़ते हुए गणेशोत्सव को एक नई और सकारात्मक दिशा देने की कोशिश की है। पुलिस निरीक्षक निलेश तांबे के नेतृत्व वाले सातारा तालुका पुलिस स्टेशन इलाके में डॉल्बी की आवाज इस बार काफी नीचे सुनाई दे रही है।
पुलिस प्रशासन की जागरूकता मुहिम को गांव-गांव से जबरदस्त समर्थन मिला है। कुल ९५ गांवों ने एक गांव, एक गणपति का उपक्रम अपनाया है। खास बात यह है कि सातारा तालुके के १५३ गांवों में से १२१ गांवों ने डॉल्बीमुक्त गणेशोत्सव मनाने का फैसला किया है। पुलिस निरीक्षक निलेश तांबे ने अलग-अलग गणेशोत्सव मंडलों से जो अपील की, उसके जवाब में १५३ में से १२१ मंडलों ने जो समर्थन दिखाया, वह पूरे जिले के लिए एक मिसाल बन गया है।
यह बदलाव जिला पुलिस अधीक्षक निखिल पिंगले, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. वैशाली कडूकर और डीवायएसपी विपुल पाटील के मार्गदर्शन में मुमकिन हो पाया। पुलिस निरीक्षक निलेश तांबे ने गणेशोत्सव शुरू होने से पहले अलग-अलग गांवों के पुलिस पाटील और गणेशोत्सव मंडलों के पदाधिकारियों को इकट्ठा कर डॉल्बी से सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में समझाया।
इस बीच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैशाली कडूकर की सातारा में गणेशोत्सव मंडलों के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में जब कई लोगों ने डॉल्बी में चार बेस की परमिशन को लेकर अपनी बात रखी, तो डॉ. कडूकर ने जवाब दिया कि दो-चार नहीं, उससे ज्यादा बेस की परमिशन भी दी जा सकती है, लेकिन शर्त यह होगी कि जहां डॉल्बी बजाई जाएगी, वहां पहले अपने घर के बुजुर्गों को लाकर बिठाया जाए, उसके बाद ही डॉल्बी बजाई जाए। यह बात सुनते ही पूरे सभागृह में सन्नाटा छा गया। इसके बाद सातारा तालुके के कई मंडलों के कार्यकर्ताओं ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए डॉल्बी को नो एंट्री कर दिया।
सातारा तालुका पुलिस स्टेशन की सीमा में कुल १५३ गांव और ३८९ गणेशोत्सव मंडल आते हैं। गणेशोत्सव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने अलग-अलग गांवों में मंडलों, ग्रामीणों और पदाधिकारियों से बातचीत कर शांतिपूर्ण, अनुशासित और सामाजिक संदेश देने वाला गणेशोत्सव मनाने की अपील की थी। पुलिस निरीक्षक निलेश तांबे के मार्गदर्शन में चली इस जागरूकता मुहिम का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
पिछले साल तालुके के ७१ गांवों ने एक गांव, एक गणपति उपक्रम अपनाया था। इस बार यह संख्या बढ़कर ९५ गांवों तक पहुंच गई है। गांव-गांव में एक ही सार्वजनिक गणपति की स्थापना करके उत्सव में होने वाली फालतू होड़, खर्च और भीड़ कम करने के साथ-साथ गांव में आपसी भाईचारा बढ़ाने की कोशिश भी इसके जरिए की जा रही है।