सरकार ने गहरे समुद्र की गैस का दाम बढ़ाया, CNG और PNG पर असर की आशंका
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दुर्गम और गहरे समुद्री इलाकों की गैस का अधिकतम दाम 8.90 डॉलर से बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति MMBtu कर दिया है।
महंगाई की मार के बीच अब सरकार ने प्राकृतिक गैस का अधिकतम दाम भी बढ़ा दिया है। पेट्रोल और डीजल के दाम और बढ़ने की चर्चा पहले से चल रही है, और अब गैस के दाम में हुई यह बढ़ोतरी आम आदमी की चिंता और बढ़ा सकती है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गहरे, अति-गहरे और उच्च-दाब-उच्च-तापमान वाले इलाकों से निकलने वाली गैस का अधिकतम दाम प्रति MMBtu 8.90 डॉलर से बढ़ाकर 9.89 डॉलर कर दिया है। भारतीय रुपयों में इसका मतलब अंदाजे से 930 प्रति एमएमबीटीयू से बढ़कर अंदाजे से 1030 प्रति एमएमबीटीयू होना है।
सरकार ने यह बढ़ोतरी दुर्गम और गहरे समुद्र वाले इलाकों में बनने वाली गैस के अधिकतम दाम में की है। नए दाम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे और अगले छह महीने, यानी 31 मार्च 2027 तक चलेंगे।
यह बदलाव खास तौर पर उन गैस क्षेत्रों पर लागू होगा, जहां गैस निकालने का खर्च आम इलाकों के मुकाबले ज्यादा आता है। दुर्गम समुद्री इलाकों से गैस निकालने वाली कंपनियों को भी इसका फायदा हो सकता है। कृष्णा-गोदावरी बेसिन का KG-D6 जैसा ब्लॉक इसी व्यवस्था में आता है।
अब सवाल यह है कि CNG और PNG पर क्या असर होगा। शहरों में CNG और PNG पहुंचाने के लिए प्राकृतिक गैस ही इस्तेमाल होती है। इसके अलावा खाद बनाने और बिजली पैदा करने में भी यह एक अहम कच्चा माल है। इसलिए देश में बनने वाली गैस के दाम में बदलाव का असर इन सब जगह गैस की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि सिर्फ गैस का अधिकतम दाम बढ़ने से CNG और PNG के दाम उसी हिसाब से फौरन बढ़ जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है।
भारत में गाड़ियों में CNG, घरों में PNG, और बिजली व खाद बनाने में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। ऐसे में बढ़े हुए दाम का असर इन सभी क्षेत्रों पर हो सकता है: CNG और PNG की सप्लाई, खाद उत्पादन, बिजली निर्माण और शहरी गैस वितरण। अगर आप CNG या PNG इस्तेमाल करते हैं, तो इस बदलाव का असर आपके बजट पर भी पड़ सकता है।