साबुन और बॉडी वॉश में आखिर क्या है फर्क, त्वचा के हिसाब से चुनें सही विकल्प
नहाने के लिए साबुन के साथ अब बॉडी वॉश भी खूब चल रहा है। दोनों की बनावट, त्वचा पर असर और इस्तेमाल का तरीका अलग है।
नहाने के लिए ज्यादातर लोग साबुन ही इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब बॉडी वॉश लगाने वालों की गिनती भी बढ़ती जा रही है। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि दोनों में आखिर फर्क क्या है। वजह यह है कि दोनों का इस्तेमाल शरीर का मैल साफ करने और फ्रेश महसूस करने के लिए ही किया जाता है।
दोनों के बीच सबसे बड़ा फर्क यह है कि साबुन ठोस रूप में होता है और त्वचा की गहराई से सफाई करता है। दूसरी तरफ बॉडी वॉश एक लिक्विड क्लीन्जर है। वह त्वचा की सफाई तो करता ही है, साथ ही त्वचा को ज्यादा नमी यानी हाइड्रेशन और आर्द्रता भी देता है।
दोनों को बनाने का तरीका भी अलग है। पारंपरिक साबुन तेल या चरबी को अल्कली के साथ मिलाकर सैपोनिफिकेशन के जरिए तैयार किया जाता है। वहीं ज्यादातर बॉडी वॉश पानी पर आधारित होते हैं और उनमें कृत्रिम डिटर्जेंट और झाग बनाने वाली चीजें होती हैं।
अब सबसे अहम बात, यानी त्वचा पर इसका असर क्या होता है। साबुन त्वचा का नैचुरल तेल और गहराई में जमी गंदगी जल्दी निकाल देता है। इस वजह से कभी-कभी त्वचा सूखी लग सकती है। बॉडी वॉश में एक्स्ट्रा मॉइश्चराइजिंग चीजें होती हैं, जो सूखी या संवेदनशील त्वचा के लिए फायदेमंद होती हैं।
इस्तेमाल करने का तरीका भी जुदा है। साबुन को सीधे त्वचा पर रगड़कर लगाया जाता है। बॉडी वॉश आम तौर पर लूफा या स्पंज से लगाया जाता है, जिससे झाग ज्यादा बनता है।
टिकाऊपन और पर्यावरण की बात करें तो साबुन ज्यादा चलता है और पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है। बॉडी वॉश को सफर और सफाई के लिहाज से सुविधाजनक माना जाता है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनों अपनी-अपनी जगह ठीक हैं। कौन सा चुनना है, यह आपकी त्वचा के प्रकार पर निर्भर करता है।