रत्नागिरी में मछली उत्पादन बढ़ा फिर भी मछुआरे संकट में, सरकार से मदद की मांग
रत्नागिरी जिले में मासेमारी नौकाओं की संख्या घटी और डीजल का खर्च बढ़ा, मछुआरा संगठनों ने राज्य सरकार से मत्स्य दुष्काल घोषित करने की मांग की
केंद्र सरकार ने सागरी मत्स्यव्यवसाय गणना 2025 के तहत देश भर में मछली पालन व्यवसाय की असली तस्वीर जानने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इसमें पिछले कुछ सालों का कुल मत्स्य उत्पादन, मछुआरा परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, उनकी आमदनी, बीमा, कर्ज, सरकारी योजनाओं का फायदा और तकनीक की वजह से व्यवसाय में आए बदलाव जैसी पूरी जानकारी डिजिटल तरीके से इकट्ठा की जा रही है।
देश के 13 तटीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 5 हजार गांवों के 12 लाख मछुआरा परिवारों को इस गणना में शामिल किया गया है। इनमें कोकण का बड़ा मत्स्य केंद्र माने जाने वाले रत्नागिरी जिले का आंकड़ा खासा अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां की इकोनॉमी और हजारों परिवारों की रोजी रोटी सीधे मछली पकड़ने के व्यवसाय पर टिकी हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक साल 2024-25 में रत्नागिरी जिले का सागरी मत्स्योत्पादन 71 हजार 303 मेट्रिक टन रहा। 2023-24 में यह आंकड़ा 67 हजार 907 मेट्रिक टन था, यानी इस साल उत्पादन में 3 हजार 396 मेट्रिक टन की बढ़ोतरी दर्ज हुई। लेकिन उत्पादन बढ़ने के बावजूद मछुआरों की आर्थिक दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। इससे पहले के सालों में जिले में मछली पकड़ने वाली नौकाओं की संख्या और उत्पादन दोनों में बड़ी गिरावट आई थी।
2021-22 में जिले में 2 हजार 936 मछली पकड़ने वाली नौकाएं थीं, जो 2022-23 में घटकर 2 हजार 520 रह गईं। इसी दौरान मछली का उत्पादन भी 1 लाख 12 हजार 28 मेट्रिक टन से गिरकर 62 हजार 797 मेट्रिक टन पर आ गया था। मछुआरों की मुश्किलों के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं, मौसम में लगातार हो रहे प्रतिकूल बदलाव, समुद्र में बढ़ती गर्मी, मछलियों के भंडार में कमी, बार बार आने वाले तूफानों की वजह से मछली पकड़ने के दिन बर्बाद होना, और डीजल का लगातार बढ़ता खर्च।
चालू मछली पकड़ने के सीजन में आमदनी में भारी गिरावट को देखते हुए रत्नागिरी के मछुआरा संगठनों ने राज्य सरकार से आधिकारिक तौर पर मांग की है कि इस इलाके में मत्स्य दुष्काल घोषित किया जाए और मछुआरों को विशेष आर्थिक मदद दी जाए। संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च और घटती आमदनी की वजह से मछुआरा परिवारों की हालत बिगड़ती जा रही है, इसलिए सरकार की तरफ से तुरंत राहत जरूरी है।