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01:34 IST

पुणे पुलिस भर्ती में फर्जी खेल सर्टिफिकेट रैकेट, एक शहर के नाम से खुला मामला

पुणे पुलिस भर्ती में खेल आरक्षण के तहत फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी पाने का मामला सामने आया, जांच एक नाम की गलती से शुरू हुई।

पुणे पुलिस भर्ती में फर्जी खेल सर्टिफिकेट रैकेट, एक शहर के नाम से खुला मामला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे पुलिस भर्ती में खेल कोटे का गलत फायदा उठाकर नौकरी पाने का बड़ा मामला सामने आया है। कुराश और ड्रैगनबोट नाम के खेलों के फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर उम्मीदवारों को बेचे जाने का आरोप है। खास बात यह है कि इस पूरे रैकेट की जांच शुरू होने की वजह एक शब्द की गलती बनी।

जांच के दौरान 2018-19 में बनाए गए कुछ सर्टिफिकेट पर 'छत्रपती संभाजीनगर' और 'धाराशिव' नाम मिले। लेकिन उस समय इन दोनों शहरों के नाम क्रमशः औरंगाबाद और उस्मानाबाद थे। दोनों शहरों के नाम 2023 में बदले गए थे। ऐसे में 2018-19 में बने सर्टिफिकेट पर 2023 के बाद अस्तित्व में आए नाम कैसे आए, यह सवाल जांच अधिकारियों के सामने खड़ा हो गया। इसी सूत्र को पकड़कर पुलिस ने सर्टिफिकेट की जांच शुरू की और फर्जी सर्टिफिकेट का रैकेट खुल गया।

पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। पुलिस के मुताबिक फर्जी खेल सर्टिफिकेट के आधार पर पुणे पुलिस दल में 19 लोगों की नियुक्ति हुई थी। इनकी नियुक्ति रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ऐसा कमिश्नर ने बताया।

जांच में सामने आया है कि 2016 से राज्य में करीब 1,200 से 1,500 लोगों को हर एक से 3 से 5 लाख रुपये लेकर फर्जी खेल सर्टिफिकेट बेचे जाने का शक है। इस शुरुआती अनुमान के मुताबिक पूरे मामले का आर्थिक आकार करीब 75 करोड़ रुपये तक जा सकता है। हालांकि घोटाले की सही रकम, सर्टिफिकेट की संख्या और इसका फायदा लेने वालों की सही गिनती जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

पुलिस का कहना है कि जांच में और भी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। खेल निरीक्षक की मौजूदगी नहीं होने पर, और मुकाबलों का आधिकारिक रिकॉर्ड, फीस की रसीद या खिलाड़ियों की फोटो उपलब्ध न होने के बावजूद सर्टिफिकेट बनाकर उम्मीदवारों को दिए जाने का शक है। इन सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी में 5 फीसदी खेल आरक्षण का फायदा लिया गया, यह पुलिस जांच में सामने आया है।

इस मामले में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर दीपक लगड की शिकायत पर शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र राज्य कुराश असोसिएशन के अध्यक्ष अंकुश विठ्ठल नागर और सचिव शिवाजी साळुंखे को गिरफ्तार किया है।

फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए बड़े पैमाने पर पैसों का लेनदेन होने के शक की वजह से पुलिस ने संबंधित लोगों की माली हालत की भी जांच शुरू कर दी है। संपत्ति और आर्थिक लेनदेन की जानकारी लेने के लिए रजिस्ट्रेशन एंड स्टैम्प डिपार्टमेंट और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को पत्र भेजा गया है। इस मामले में और किसी की भूमिका है या नहीं, कितने सर्टिफिकेट बनाए गए और इनका फायदा लेकर कितने लोगों ने सरकारी नौकरी पाई, इसकी जांच जारी है।

एक तरफ फर्जी सर्टिफिकेट बनाने में बड़े पैमाने पर प्लानिंग की गई थी, लेकिन सर्टिफिकेट पर इस्तेमाल किए गए 'छत्रपती संभाजीनगर' और 'धाराशिव' नाम ही रैकेट की जड़ तक पहुंचने का सूत्र बन गए। 2018-19 के दस्तावेजों पर 2023 के बाद के नाम आने से जो शक पैदा हुआ, उसी से इस मामले की जांच आगे बढ़ी। अब इस रैकेट के पीछे और कौन-कौन है और फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी नौकरी पाने वालों की संख्या कितनी है, इस पर सबकी नजर टिकी है।

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