परेल का राजा: 80 साल पुरानी परंपरा, नरेपार्क मैदान की भव्य गणपति मूर्ति की कहानी
मुंबई के परेल इलाके में स्थापित होने वाले परेल का राजा गणपति की स्थापना, इतिहास और समाजसेवा के कामों की पूरी कहानी।
मुंबई के सबसे पुराने और मशहूर सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों में परेल विभाग सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। इसी मंडल को लोग परेल के राजा के नाम से जानते हैं। हर साल यह मंडल मुंबई के परेल इलाके के नरे पार्क मैदान पर बाप्पा की एक भव्य मूर्ति स्थापित करता है, और यही परंपरा इसे शहर के सबसे लोकप्रिय गणेश मंडलों में शुमार करती है।
इस मंडल की शुरुआत की कहानी 1947 से जुड़ी है, यानी भारत को आजादी मिलने के उसी साल कुछ स्थानीय गणेश भक्तों और परेल विभाग के कार्यकर्ताओं ने मिलकर नरे पार्क मैदान पर यह उत्सव शुरू किया था। शुरुआत में यह एक छोटा सा प्रयास था, लेकिन धीरे-धीरे नरेपार्क मैदान में सभी गणेश कार्यकर्ता एक साथ जुड़ते गए और यह मंडल एक बड़े वटवृक्ष जैसा फैलता चला गया। आज यही छोटी सी पहल मुंबई के सबसे बड़े आकर्षणों में गिनी जाती है। साल 2026 में यह मंडल अपनी स्थापना के 80वें साल में कदम रख रहा है, जो इसकी लंबी और गौरवशाली यात्रा को दर्शाता है।
परेल का राजा हमेशा से अपनी भव्य और विशालकाय मूर्तियों के लिए जाना जाता रहा है। अलग-अलग सालों में यहां 23 फुट से लेकर 28 फुट तक की ऊंचाई वाली मूर्तियां स्थापित की जाती रही हैं, और कई बार तो इससे भी ऊंची मूर्तियां देखने को मिली हैं। मंडल सिर्फ धूमधाम से उत्सव मनाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पिछले कई दशकों से सामाजिक और समाजकल्याण से जुड़े कामों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेता आ रहा है।
हर बरस बाप्पा की मूर्ति का रूप बदलता रहता है, और इस साल भी एक बेहद आकर्षक मूर्ति स्थापित की गई है। इस बार परेल के राजा की यह मूर्ति हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है। खासतौर पर बाप्पा की मनमोहक आंखें और सिर पर सजी टोपी लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
हर साल बाप्पा का दरबार सजाने के लिए देश के मशहूर मंदिरों या ऐतिहासिक स्मारकों से प्रेरित भव्य और अनोखे मंडप तथा चित्ररथ तैयार किए जाते हैं। अक्सर लोग परेल इलाके के लालबाग के राजा और मुंबई के राजा गणेश गल्ली, इन दोनों बाप्पा को नरेपार्क के बाप्पा के साथ गड्डमड्ड कर देते हैं, लेकिन परेल का राजा यानी नरेपार्क का बाप्पा अपनी एक अलग और ऐतिहासिक पहचान रखता है।