मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

पानी की कमी से नाचनवेल-पिशोर इलाके में फसलें सूखीं, किसान कर्ज और घर खर्च को लेकर परेशान

नाचनवेल-पिशोर इलाके में पानी न मिलने से खड़ी फसलें सूख रही हैं और किसान कर्ज, घर खर्च और जानवरों के चारे-पानी की चिंता में हैं।

पानी की कमी से नाचनवेल-पिशोर इलाके में फसलें सूखीं, किसान कर्ज और घर खर्च को लेकर परेशान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नाचनवेल इलाके के किसानों पर एक के बाद एक मुसीबत आ पड़ी है। बड़ी मेहनत करके, पसीना बहाकर और कर्ज लेकर जो फसलें खड़ी की थीं, वे पानी न मिलने की वजह से सूखती जा रही हैं। जो फसल लगभग हाथ में आ चुकी थी, उसे किसान अपनी आंखों के सामने सूखते देख रहे हैं। इसी वजह से किसानों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ रही है।

फसल उगाने के लिए किसानों ने बीज, खाद, दवाइयां, जुताई और मजदूरी पर बड़ा खर्च किया। कुछ ने व्यापारियों से उधार लिया, तो कुछ ने कर्ज लेकर खेती खड़ी की। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी और उपज से सारी देनदारी चुकाई जा सकेगी। लेकिन अब पानी के बिना फसलें सूखने लगी हैं और किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फिरने जैसे हालात बन गए हैं।

किसानों की हालत को और बदतर बना रही है घर के खर्च की बढ़ती फिक्र। एक तरफ खेत में खड़ी फसल सूख रही है और उससे कमाई की उम्मीद घट रही है। दूसरी तरफ घर के किराने का सामान, जरूरी चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च बढ़ता ही जा रहा है।

खेती के माल को सही भाव नहीं मिल रहा, फसल हाथ से निकल रही है और घर चलाने की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसान जिएं तो कैसे? यही सवाल आज नाचनवेल-पिशोर इलाके के कई किसानों के मन में घूम रहा है। घर का चूल्हा जलाने के लिए पैसा चाहिए, बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा चाहिए, बीमारी के इलाज के लिए पैसा चाहिए, जानवरों के चारे-पानी के लिए पैसा चाहिए और अगले सीजन के लिए फिर से खेती में पैसा लगाना होगा। मगर कमाई का मुख्य सहारा खेती ही मुश्किल में आ गई है।

खेती के लिए लिया कर्ज, व्यापारियों की उधारी, बीज-खाद-दवाइयों के पैसे और घर का रोज का खर्च, इन सबका हिसाब बैठाते-बैठाते किसान पूरी तरह थक चुका है। साल भर मेहनत करने के बाद भी अगर हाथ में कुछ न बचे, तो आगे गृहस्थी की गाड़ी कैसे खींची जाए, यह सवाल किसानों के सामने खड़ा है। किसानों की इस गंभीर हालत पर प्रशासन को फौरन ध्यान देने की जरूरत है। संबंधित विभाग को खेतों में जाकर फसलों की पाहणी करनी चाहिए और पंचनामे करने चाहिए।

फसलों के साथ-साथ जानवरों के चारे-पानी का सवाल भी गंभीर होता जा रहा है। पानी कम होने से किसानों को यह चिंता सता रही है कि मवेशियों को पानी कहां से पिलाएं और चारा कहां से लाएं। इंसानों की गृहस्थी के साथ जानवरों की जिम्मेदारी भी किसानों को ही उठानी पड़ रही है।

खेत में कमाई नहीं है, लेकिन घर का खर्च रुकता नहीं। जानवरों के चारे-पानी का सवाल अब सबसे ऊपर आ गया है। इसलिए किसानों की मांग है कि सरकार उनकी मदद करे और प्रशासन अब खेत की मेड़ तक पहुंचे।

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