गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:54 IST

पंढरपुर: नए कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत यादव ने सत्कार की जगह मांगी सेवा

श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति के नए कार्यकारी अधिकारी ने पदभार संभालते ही हार-फूल की जगह दान मांगा और सीधे कामकाज का जायजा लेना शुरू कर दिया।

पंढरपुर: नए कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत यादव ने सत्कार की जगह मांगी सेवा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मंत्रालय में कक्ष अधिकारी रहे श्रीकांत यादव ने हाल ही में श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिरे समिति, पंढरपुर के कार्यकारी अधिकारी का पदभार संभाला है। पदभार लेते ही उन्होंने औपचारिक सत्कार-सम्मान में वक्त जाया करने के बजाय सीधे मंदिर समिति के प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी। इससे साफ हो गया कि वे भक्तों को केंद्र में रखने वाला, पारदर्शक और अनुशासित प्रशासन चलाना चाहते हैं।

सरकार ने मंदिर समिति के कार्यकारी अधिकारी पद पर मंत्रालय के अधिकारी श्रीकांत यादव को प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया है। यादव मंत्रालय के अलग-अलग विभागों में कक्ष अधिकारी रह चुके हैं और मूल रूप से बार्शी तालुका के वैराग गांव के रहने वाले हैं। इस पद पर इससे पहले उपजिल्हाधिकारी राजेंद्र शेळके प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। शेळके की तीन साल की प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने के बाद उनका कार्यकाल खत्म हुआ, जिसके बाद सरकार ने यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी।

मंदिर समिति के ढांचे में कार्यकारी अधिकारी, व्यवस्थापक और लेखाधिकारी - ये तीन पद सरकार स्तर के हैं। यादव के पदभार संभालते ही मंदिर समिति के पदाधिकारी, अधिकारी, कर्मचारी और अलग-अलग क्षेत्रों के जाने-माने लोग उनसे मिलने और स्वागत करने पहुंचने लगे। बहुत से लोग उनके लिए हार, गुलदस्ते और सत्कार की सामग्री लेकर आ रहे थे।

लेकिन यादव ने "सत्कार से ज्यादा जरूरी सेवा है" कहते हुए एक अपील की। उन्होंने कहा कि स्वागत के लिए हार-फूल और गुलदस्ते लाने के बजाय लोग श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिरे समिति के अन्नछत्र या गोशाला के लिए दान दें। उनका कहना है कि हार-फूल पर जो पैसा खर्च होता है, अगर वही पैसा अन्नछत्र या गोशाला को दिया जाए तो उसका सीधा फायदा भक्तों, वारकरियों और गायों की सेवा में होगा।

पदभार संभालने के बाद यादव ने औपचारिक स्वागत-सत्कार को ज्यादा तवज्जो न देकर मंदिर समिति के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को प्राथमिकता दी है। उन्होंने मंदिर समिति के अलग-अलग विभागों का जायजा लेना शुरू कर दिया है, जिसमें उन विभागों का कामकाज, लंबित मामले, उपलब्ध सुविधाएं और प्रशासन के सामने आने वाली दिक्कतों की जानकारी ली जा रही है।

पंढरपुर के विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में रोज बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। इसी वजह से भक्तों को बेहतर सुविधाएं देना, मंदिर समिति के प्रशासन को तेज और पारदर्शक बनाना और कामकाज में अनुशासन लाना, यादव की शुरुआती कार्यशैली से उनकी प्राथमिकता के तौर पर दिख रहा है। हार-फूल के सत्कार से ज्यादा सेवा को अहमियत देने वाले यादव की इस भूमिका की मंदिर परिसर में चर्चा शुरू हो गई है।

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