मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

नेरळ सोसायटी की सालाना सभा में हंगामा, किसानों ने एजेंडा, कर्जमाफी और ई-फसल निरीक्षण पर घेर लिया

नेरळ सोसायटी की सालाना सभा में हंगामा, किसानों ने एजेंडा, कर्जमाफी और ई-फसल निरीक्षण पर घेर लिया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कर्जत तालुका की बड़ी विविध विकास कार्यकारी सोसायटियों में गिनी जाने वाली नेरळ विविध विकास कार्यकारी सोसायटी की वार्षिक सर्वसाधारण सभा नेरळ के शेतकरी भवन में हुई। सभा खत्म हुई, लेकिन किसानों के सवालों के जवाब नहीं मिले। सभा में बस यह भरोसा दिया गया कि अगली सभा में पुराने सवाल खड़े नहीं होंगे।

बैठक शुरू होते ही किसान सदस्यों ने शिकायत की कि उन्हें सभा का एजेंडा नहीं मिला। इसके बाद किसानों ने कहा कि एजेंडा के साथ रिपोर्ट और सालाना बैलेंस शीट भी नहीं दिया गया, इसलिए यह सभा गैरकानूनी है। सभा अध्यक्ष सावळाराम जाधव ने संस्था की चूक मानी। उन्होंने ऐलान किया कि अगली वार्षिक सभा से रिपोर्ट और बैलेंस शीट सभी किसान सदस्यों को दिया जाएगा।

इतिवृत्त पढ़ा जा रहा था, तभी किसान मारुती विरले और संदीप मसणे ने शिकायत की कि कई विषयों पर अमल हुआ ही नहीं। पिछली वार्षिक सभा में जो फैसले और प्रस्ताव हुए थे, उन पर अमल न होने से किसानों ने नाराजगी जताई।

अध्यक्ष जाधव ने बताया कि संचालक मंडल ने गोदाम बनाने के लिए संस्था की अपनी मालिकाना जमीन खरीदने का फैसला किया है। इस पर पुंडलिक शिनारे ने कहा कि संचालक मंडल जमीन देख ले, लेकिन सारा सौदा पूरा न करे। उनकी मांग थी कि जमीन खरीदने से पहले सभी सदस्य किसानों की सभा बुलाई जाए।

ई-फसल सर्वे न होने को लेकर भी किसानों में नाराजगी दिखी। तहसीलदार को निवेदन देने की मांग उठी, तो बताया गया कि अध्यक्ष ने पिछले साल इस बारे में पत्राचार किया था। फिर भी ई-फसल सर्वे नहीं हो रहा, इसलिए मारुती विरले और दूसरे किसानों ने मांग की कि संचालक मंडल सख्त रुख अपनाए।

संदीप मसणे ने शिकायत की कि किसानों को कर्ज लेने के लिए जमीनदारों के दस्तखत लेने पड़ते हैं। इस वजह से किसानों को कर्ज नहीं मिल पाता। कई किसानों और जमीनदारों ने यह शर्त ढीली करने की मांग की। संचालक मंडल और अध्यक्ष ने कहा कि वरिष्ठों से मार्गदर्शन लेकर फैसला होगा, पर कोई फैसला नहीं हुआ।

किसानों ने शिकायत की कि सरकार की कर्जमाफी सबको नहीं मिल रही और मांग की कि लाभार्थियों की सूची पढ़ी जाए। सचिव ने वक्त नहीं है, कहकर सूची पढ़ने में टालमटोल की। आखिर में सिर्फ उन किसानों की सूची पढ़ी गई जिनके कागजात अधूरे हैं। उन्हें कर्जमाफी क्यों नहीं मिली, इस सवाल पर अध्यक्ष जाधव ने भरोसा दिया कि उनके अधूरे कागजात पूरे करवाए जाएंगे।

सभा में तय हुआ कि कर्जत तालुका के तहसीलदार को तुरंत निवेदन दिया जाएगा। सभा में सूखा घोषित करने की मांग का निवेदन सरकार को देने का भी फैसला हुआ। जाधव ने कहा, "राज्य में सूखा घोषित हुआ है और कर्जत तालुका में और 8 दिन बारिश नहीं पड़ी तो हमारे तालुका में भी सूखे की स्थिति बन जाएगी। कर्जत तालुका के तहसीलदार को निवेदन देने का इस सभा में तय हुआ है।"

सभा में सोसायटी के अध्यक्ष राजेंद्र विरले, उपाध्यक्ष रवींद्र झांजे, जिला परिषद के पूर्व सदस्य नागो गवळी, संचालक शशिकांत मोहिते, यशवंत कराळे, विष्णू कालेकर, नारायण तरे, संजय शिंदे, वैभव भगत, घोडू आखाडे, महिला संचालक अर्चना शेळके, कुंदा सोनवले और सचिव श्रीकांत पिंगळे मौजूद थे।

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