मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:47 IST

नवरात्रि-दिवाली में 50 हजार के बजट में शुरू करें ये 5 कारोबार, लाइसेंस भी नहीं चाहिए

त्योहारों के मौसम में छोटे कारोबारों की मांग बढ़ती है। कम पूंजी में शुरू होने वाले पांच धंधों की जानकारी।

नवरात्रि-दिवाली में 50 हजार के बजट में शुरू करें ये 5 कारोबार, लाइसेंस भी नहीं चाहिए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारत में त्योहार बड़े जोश से मनाए जाते हैं। श्रावण शुरू होने के बाद से त्योहारों की कतार लग गई है। गणेशोत्सव की धूम अभी थमी ही है कि अब नवरात्री, दसरा, करवा चौथ, धनतेरस और दिवाली एक के बाद एक आ रहे हैं। छोटे कारोबारियों के लिए यह साल का सबसे फायदेमंद वक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कई छोटी चीजों की मार्केट में अच्छी मांग बढ़ जाती है। जिनका बजट कम है और जो बड़े तामझाम के बिना धंधा शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए ये पांच कारोबार गिनाए गए हैं।

पहला कारोबार पूजा साहित्य और त्योहार की किट का है। नवरात्री और दिवाली में पूजा के सामान की मांग तेजी से बढ़ती है। अगरबत्ती, कपूर, घी के दिए, कपास की बातियां, चुनरी, नारियल, कलश, रोली, मौली और पूजा थाली जैसी चीजें किट बनाकर बेची जा सकती हैं। यह काम अंदाजन 20,000 से 50,000 रुपये की लागत से शुरू हो सकता है। बिक्री लोकल बाजारों में, कॉलोनियों के गेट पर, मंदिरों के आसपास और ऑनलाइन की जा सकती है। त्योहार के वक्त इन चीजों पर अच्छा मुनाफा मिलता है।

दूसरा कारोबार सूखे मेवे और गिफ्ट पैकिंग का है। दिवाली में सूखे मेवे और गिफ्ट हैम्पर की बड़ी मांग रहती है। बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश और अंजीर थोक बाजार से खरीदकर आकर्षक पैकिंग में बेचे जा सकते हैं। अच्छी पैकिंग और ब्रांडिंग से हर बॉक्स पर 15 से 30 प्रतिशत मुनाफा कमाया जा सकता है। यह धंधा 50,000 रुपये की लागत से शुरू हो सकता है। कॉर्पोरेट गिफ्टिंग और रिहायशी सोसायटियां इसके मुख्य ग्राहक हो सकती हैं।

तीसरा कारोबार सजावट और रोशनी के सामान का है। नवरात्री और दिवाली में घर, दुकान और दफ्तर सजाने के लिए एलईडी लाइट, रंगोली स्टिकर, नकली फूल, दीवार की सजावट और फेयरी लाइट की मांग बढ़ती है। यह माल दिल्ली, जयपुर, सूरत या लोकल थोक बाजार से खरीदकर बेचा जा सकता है। यह कारोबार 30,000 से 1 लाख रुपये की लागत से शुरू हो सकता है। त्योहार में मांग बढ़ने से बिक्री में बड़ा उछाल आता है।

चौथा कारोबार घर पर बनी नमकीन, मिठाई और स्नैक्स का है। त्योहारों में लोग मिठाई और नमकीन बड़ी मात्रा में खरीदते हैं। खाना बनाने का तजुर्बा हो तो घर बैठे नमकीन, चिवड़ा, मठरी, लड्डू, शक्करपारा या दूसरे स्नैक्स बनाकर बेचे जा सकते हैं। कम लागत से शुरू होने वाले इस धंधे में अच्छा मुनाफा हो सकता है। ऑर्डर सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप और लोकल डिलिवरी नेटवर्क से लिए जा सकते हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर काम करना हो तो FSSAI के नियमों का पालन जरूरी है।

पांचवां कारोबार मिट्टी के दिए और पर्यावरण के अनुकूल चीजों का है। पिछले कुछ सालों से त्योहारों में मिट्टी के दिए, गोबर के दिए, प्राकृतिक रंगोली, जैविक सजावट का सामान और हाथ से बनी चीजों की मांग बढ़ रही है। ये चीजें कुम्हारों या स्वयं-सहायता समूहों से खरीदकर शहरों में और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेची जा सकती हैं। इससे गांव के उत्पादकों को बाजार मिलता है और उन्हें अच्छा मुनाफा कमाने का मौका भी। त्योहार में कई चीजों पर 15 से 40 प्रतिशत मुनाफा मिल सकता है। त्योहार से पहले माल का स्टॉक करने, आकर्षक पैकिंग और डिजिटल प्रमोशन से बिक्री बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। त्योहारों में मांग तेजी से बदलती है, इसलिए मार्केट को अपनी सहूलियत से परखे बिना बड़ी मात्रा में माल खरीदने से बचें। खाने की चीजें बेचते वक्त क्वालिटी और नियमों का पालन पक्का करें। डिजिटल पेमेंट और होम डिलिवरी जैसी सुविधाएं ग्राहकों को लुभा सकती हैं। अच्छी पैकिंग के साथ कोई अतिरिक्त चीज मुफ्त देने से बिक्री बढ़ने की संभावना है।

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