नागपुर पुलिस के ऑपरेशन थंडर में 1,438 आरोपी गिरफ्तार, करीब 22 करोड़ का माल जब्त
नागपुर पुलिस का ऑपरेशन थंडर नशे के कारोबार पर कार्रवाई के साथ पूरे नेटवर्क और जागरूकता पर भी केंद्रित रहा।
नागपुर पुलिस का 'ऑपरेशन थंडर' अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित अभियान नहीं रहा। इसे शहर के पूर्व सीपी और एडीजी रवींद्रकुमार सिंगल के कार्यकाल में शुरू किया गया था। अभियान में नशे के सौदागरों को पकड़ने और ड्रग्स जब्त करने के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने पर जोर दिया गया। अवैध कमाई के स्रोत तलाशने और समाज को नशामुक्ति की मुहिम से जोड़ने पर भी ध्यान रहा।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, ऑपरेशन थंडर के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 1,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। करीब 1,438 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। लगभग 22 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त हुए, जिनमें करीब 1,500 किलो गांजा और 17 किलो मेफेड्रोन भी शामिल है।
इस अभियान की खासियत यह रही कि पुलिस का फोकस सिर्फ सड़क पर ड्रग्स बेचने वाले छोटे पैडलरों तक नहीं रहा। नशे की सप्लाई चेन के पीछे कौन लोग हैं, पैसा कहां से आ रहा है और इस कारोबार से जुड़े आर्थिक संसाधन किसके नियंत्रण में हैं, इसकी भी पड़ताल की गई।
एडीजी सिंगल का मानना था कि एक पैडलर के पकड़े जाने से नशे का कारोबार खत्म नहीं होता, क्योंकि उसकी जगह कोई दूसरा खड़ा हो सकता है। इसलिए कार्रवाई का लक्ष्य उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है जो पूरे नेटवर्क को चलाते हैं और उसके लिए पैसे का इंतजाम करते हैं।
नागपुर पुलिस ने रोकथाम और जागरूकता को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया। स्कूल और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम हुए। पुलिस के मुताबिक, इन कार्यक्रमों के जरिए 5 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई। युवाओं को नशे के नुकसान के बारे में बताया गया और एंटी-ड्रग शपथ तथा जनजागरूकता कार्यक्रम भी कराए गए।
झुग्गी-बस्तियों और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में भी पुलिस ने लोगों से संपर्क अभियान चलाया। पुलिस का जोर इस बात पर रहा कि युवा नशे की गिरफ्त में आने से पहले ही उसके खतरे को समझ लें।
सिविल सेवा परीक्षा के जनरल स्टडीज पेपर-3 में आंतरिक सुरक्षा, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध वित्तीय नेटवर्क जैसे विषय आते हैं। इस लिहाज से ऑपरेशन थंडर को एक स्थानीय उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है, जो बताता है कि ड्रग तस्करी से निपटने के लिए सिर्फ गिरफ्तारी और जब्ती काफी नहीं है। नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई, खुफिया जानकारी पर आधारित पुलिसिंग, आर्थिक लेन-देन की जांच, अवैध संपत्तियों पर नजर, अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल और समाज की भागीदारी, इन सबको साथ जोड़ना जरूरी है।