नागपुर में गणेशोत्सव के दौरान पंडालों तक नहीं पहुंची FDA की जांच टीम
तुकाराम मुंढे के सख्त निर्देशों के बावजूद नागपुर एफडीए की कोई टीम अब तक किसी पंडाल में महाप्रसाद की जांच के लिए नहीं गई, सह-आयुक्त ने कहा ऐसा करना संभव नहीं है।
नागपुर में गणेशोत्सव शुरू होने से पहले अन्न व औषध प्रशासन यानी एफडीए के नागपुर विभाग ने बड़े दावों के साथ दिशानिर्देश जारी किए थे। महाप्रसाद और भंडारे में खाद्य सुरक्षा पक्की करने के लिए विभाग ने कड़े नियम बनाए थे और साफ चेतावनी दी थी कि नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई होगी। विभाग ने यह भी कहा था कि खाद्य सुरक्षा पर एफडीए की पैनी नजर रहेगी।
लेकिन उत्सव शुरू होने के बाद जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट निकली। शहर में कई जगह महाप्रसाद बांटा जा रहा है, फिर भी एफडीए की एक भी टीम अब तक किसी पंडाल में निरीक्षण के लिए नहीं पहुंची है। यानी त्योहार से पहले की सारी चेतावनियां और पैनी नजर रखने की बात सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में खाद्य पदार्थों की जांच और नियमों के सख्ती से पालन पर खास जोर दिया था, ताकि लोगों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो। लेकिन नागपुर में एफडीए विभाग के इस ढीले रवैये ने इन्हीं प्रशासनिक निर्देशों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इससे साफ जाहिर होता है कि खाद्य सुरक्षा के नाम पर एफडीए सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। इसका सबूत यह है कि अब तक किसी भी मंडल के पंडाल तक एफडीए की टीम नहीं पहुंची। पूछे जाने पर खुद विभाग ने यह मान लिया कि उसकी टीम ने अब तक एक भी पंडाल में खाद्य सुरक्षा जांचने के लिए निरीक्षण नहीं किया है। विभाग ने यह भी साफ कर दिया कि वह पंडालों में निरीक्षण नहीं कर सकता।
एफडीए के सह-आयुक्त कृष्णा जयपुरकर ने बताया कि अब तक किसी भी पंडाल का निरीक्षण नहीं हुआ है। जब उनसे कुछ दिन पहले जारी किए गए सख्त दिशानिर्देशों का हवाला देकर पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि नागपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के लिए गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा या इफ्तार जैसे सार्वजनिक और धार्मिक कार्यक्रमों में महाप्रसाद या खाने की जांच करना संभव नहीं है और उनकी टीम ऐसा नहीं कर सकती।
सह-आयुक्त के इस बयान ने साबित कर दिया कि त्योहार से पहले जारी की गई एडवाइजरी और टोल-फ्री नंबर सिर्फ औपचारिकता और खानापूर्ति भर थे। सवाल यह उठता है कि अगर विभाग के पास पंडालों में जाकर खाद्य सामग्री की जांच करने का अधिकार या इरादा ही नहीं था, तो फिर बड़े-बड़े निर्देश पत्र जारी कर सख्त कार्रवाई की चेतावनी देने का क्या मतलब था। इस त्योहारी मौके पर हर रोज हजारों लोग पंडालों में जाकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।