गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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13:47 IST

गोंडपिपरी तालुका में बायोमेट्रिक हजेरी के बावजूद अफसर मुख्यालय में नहीं रहते: नागरिकों का आरोप

गोंडपिपरी तालुका में सरकारी कर्मचारी मुख्यालय छोड़कर शहर से अप-डाउन कर रहे हैं, नागरिकों ने बायोमेट्रिक हाजिरी के बावजूद गैरहाजिरी का सवाल उठाया।

गोंडपिपरी तालुका में बायोमेट्रिक हजेरी के बावजूद अफसर मुख्यालय में नहीं रहते: नागरिकों का आरोप
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गोंडपिपरी तालुका में सरकारी कामकाज गांव तक वक्त पर पहुंचे, इसके लिए सरकार ने अफसरों और कर्मचारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अपनी नियुक्ति की जगह मुख्यालय में ही रहें। लेकिन नागरिकों का आरोप है कि गोंडपिपरी तालुका में इस नियम को पूरी तरह ठेंगा दिखाया जा रहा है। नियुक्ति गांव में होने के बावजूद कई अफसर और कर्मचारी रोज शहर से अप-डाउन कर रहे हैं, जिसकी वजह से गांव के लोगों को सरकारी काम के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

तालुके की ग्रामपंचायतों के कामकाज में अहम रोल निभाने वाले अफसर-कर्मचारियों का भी यही हाल है, ऐसा नागरिकों का कहना है। आरोप है कि करीब 80 प्रतिशत अफसर मुख्यालय में नहीं रहते, बल्कि शहर से आना-जाना करते हैं। इसका सीधा असर दफ्तर के कामकाज और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है, ऐसी शिकायत है।

गोंडपिपरी पंचायत समिति के अंडर करीब 50 ग्रामपंचायतें आती हैं, इसलिए गांव स्तर पर प्रशासन की जिम्मेदारी काफी बड़ी है। ऐसे हालात में जब संबंधित अफसर-कर्मचारियों का मुख्यालय में मौजूद रहना जरूरी है, तब अप-डाउन के इस चलन से गांव के इलाके में प्रशासन का काम धीमा पड़ रहा है, ऐसा नागरिकों को लगता है।

वैसे, 80 प्रतिशत अफसर-कर्मचारी अप-डाउन करते हैं, यह दावा नागरिकों का आरोप है, और इसकी अधिकारिक जांच प्रशासन को करनी जरूरी है। नागरिकों की मांग है कि प्रशासन बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और सीधे मौके पर जाकर पड़ताल करके इस बारे में साफ जवाब दे।

अफसर-कर्मचारियों की हाजिरी पर नजर रखने के लिए बायोमेट्रिक हजेरी की व्यवस्था लगाई गई है। लेकिन आरोप है कि यह व्यवस्था ठीक से लागू नहीं हो रही। नागरिकों का गुस्सा भरा सवाल है कि बायोमेट्रिक हजेरी होने के बावजूद अगर अफसर-कर्मचारी वक्त पर दफ्तर में मौजूद नहीं रहते, तो फिर इस सिस्टम का फायदा ही क्या है।

इस पूरे मामले पर कंट्रोल रखने की जिम्मेदारी संबंधित गटविकास अधिकारी की है, लेकिन नागरिकों का आरोप है कि इस सवाल को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। नागरिकों का कहना है कि अगर वरिष्ठ अफसरों का कंट्रोल और कार्रवाई का डर नहीं रहेगा, तो नियम तोड़ने वालों का हौसला और बढ़ता है।

मुख्यालय में रहने का सरकार का निर्देश सिर्फ कागज पर रहेगा या उसे असल में लागू किया जाएगा, यह सवाल अब उठ रहा है। मांग है कि संबंधित अफसर अचानक जांच करके अफसर-कर्मचारियों की असल हाजिरी, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और मुख्यालय में रहने की सच्चाई की पड़ताल करें।

बायोमेट्रिक हजेरी की व्यवस्था होने के बावजूद अगर अफसर-कर्मचारी दफ्तर के वक्त पर मौजूद नहीं रहते, तो संबंधित सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। नागरिकों की मांग है कि गांव के लोगों को अफसर ढूंढते हुए दफ्तरों के चक्कर काटने की नौबत न आए, इसके लिए प्रशासन ठोस कार्रवाई करे।

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