नागपुर के अरोली गांव के 45 किसानों ने मिलकर उगाया चारा, चारे की कमी में दिखाई राह
नागपुर जिले के अरोली गांव के 45 किसान सामूहिक खेती से चारा उगाकर विदर्भ के डेयरी फार्मों को बेच रहे हैं।
राज्य के बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात हैं। इसी वजह से आने वाले कुछ महीनों में चारे की भारी कमी होने की आशंका है। सालों से पाले हुए जानवरों को इस संकट में कैसे बचाया जाए, यह सवाल किसानों के सामने खड़ा है। ऐसे में नागपुर जिले के अरोली गांव के 45 किसानों ने सामूहिक खेती के जरिए एक मिसाल कायम की है।
इन किसानों ने सिर्फ अपने चारे की जरूरत ही पूरी नहीं की है। वे हर साल डेढ़ से दो करोड़ रुपये का चारा विदर्भ के सैकड़ों डेयरी फार्मों और हजारों दूध उत्पादक किसानों तक पहुंचा रहे हैं। राज्य के लाखों किसान इस सवाल से जूझ रहे हैं कि सूखे में जानवरों के लिए चारा कहां से आएगा। उसी बीच अरोली के किसानों ने चारे की कमी पर काबू पाकर आर्थिक मजबूती का रास्ता दिखाया है। इसे 'अरोली पैटर्न' कहा जा रहा है।
अरोली गांव के 45 किसानों ने 2017 में 'विश्वास सहकारी शेती विकास संघ' बनाकर सामूहिक खेती शुरू की थी। सबने मिलकर करीब 200 एकड़ खेत में नेपियर और दूसरी चारा फसलें लगाईं। शुरुआत में बेचने में दिक्कत आई। लेकिन पिछले कुछ सालों में चारा उगाने और बेचने का इन किसानों का मॉडल कामयाब रहा है। अब वे अपनी जरूरत का चारा तो उगा ही रहे हैं, साथ ही हर साल डेढ़ से दो करोड़ का चारा विदर्भ के अलग-अलग जिलों में डेयरी फार्मों और दूध उत्पादक किसानों को बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं।
यह सामूहिक खेती कैसे चलती है? हर किसान के खेत में चारा फसल लगाने के लिए बीज और बाकी साधन किसानों का बनाया 'विश्वास सहकारी शेती संघ' देता है। किसान को सिर्फ फसल की देखभाल करनी होती है और उसे पानी देना होता है। हर ढाई महीने में संघ के मजदूर आकर नेपियर घास की कटाई करते हैं।
सभी 45 किसानों के खेतों पर कटी हुई घास को और छोटे टुकड़ों में काटने के लिए एक खास कटाई मशीन दी गई है। कटाई करने वाले मजदूर ही घास को छोटे टुकड़ों में काटकर पैक करते हैं। पैक किया हुआ चारा फौरन ट्रक से ग्राहकों के डेयरी फार्म या बाड़े तक भेज दिया जाता है।
एक तय समय के बाद संघ किसानों के खाते में उनके खेत में पैदा हुए चारे के पैसे जमा करता है। विश्वास सहकारी शेती विकास संघ ने पिछले कुछ सालों में करोड़ों रुपये का चारा बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया है। साथ ही सूखे जैसी मुश्किल हालत में दूध उत्पादक किसानों को उनके जानवरों के लिए संजीवनी जैसा चारा भी मुहैया कराया है।