नागपुर दीक्षाभूमी में दान की रकम में गड़बड़ी का आरोप, धर्मदाय आयुक्त के पास शिकायत
दीक्षाभूमी में आई दान की रकम के गबन का आरोप लगाते हुए विलास गजघाटे ने नागपुर के धर्मदाय आयुक्त के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
देश भर के अलग-अलग मंदिरों से दान चोरी की शिकायतें सामने आती रहती हैं, और अब इसी तरह का एक मामला नागपुर की दीक्षाभूमी से जुड़ गया है। यहां आई दान की रकम में अपहार यानी गबन हुआ है, ऐसी शिकायत नागपुर के धर्मदाय आयुक्त के पास दर्ज कराई गई है। यह शिकायत विलास गजघाटे नाम के व्यक्ति ने की है, ऐसी जानकारी सामने आई है।
शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सबसे पहला आरोप यह है कि दानपेटी सबके सामने नहीं खोली जाती। इसके अलावा दान के रूप में जो रकम आती है, उसकी जानकारी भी नहीं दी जाती। धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के समारोह यानी कार्यक्रम के लिए बिना निविदा यानी बिना टेंडर के काम बांटे जाने का आरोप भी शिकायत में है। साथ ही सामान की खरीदारी में भी गैरव्यवहार यानी अनियमितता हुई है, ऐसा आरोप गजघाटे ने अपनी शिकायत में किया है। इस शिकायत के चलते अब यह मामला और तूल पकड़ने की आशंका जताई जा रही है, और आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
दीक्षाभूमी बाबासाहेब आंबेडकर के पंचतीर्थों में से एक मानी जाती है, और यहां देश-विदेश से लोग दर्शन के लिए आते रहते हैं। धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के मौके पर हर साल लाखों अनुयायी यहां पहुंचते हैं। साल 1956 में महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने इसी जगह पर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। तभी से दीक्षाभूमी में विजयादशमी के दिन को धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर सैकड़ों आंबेडकरी अनुयायी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अस्थिकलश के दर्शन करके बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने की परंपरा निभाते हैं। आंबेडकरी अनुयायी दीक्षाभूमी को अपना प्रेरणास्थान मानते हैं, यही वजह है कि देश भर से लाखों लोगों की भीड़ यहां हर साल जुटती है।
ठीक ऐसे समय में जब विजयादशमी और धम्मचक्र प्रवर्तन दिन नजदीक आ चुका है, दीक्षाभूमी में आई दान की रकम में गबन की यह शिकायत सामने आने से हर तरफ हलचल मच गई है।