नागपुर आरटीओ ने साढ़े तीन साल में जुटाए 555 करोड़ से ज्यादा, विदेशी गाड़ियों से भी मोटी कमाई
आरटीआई से हुआ खुलासा, रोड टैक्स और ग्रीन टैक्स से भरा नागपुर आरटीओ का खजाना
नागपुर के प्रादेशिक परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ ने पिछले साढ़े तीन साल में टैक्स वसूली में एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान अलग-अलग टैक्स के जरिए आरटीओ के खजाने में कुल 5,55,80,56,409 रुपये से ज्यादा जमा हुए हैं। इतनी बड़ी रकम देखकर लोग आरटीओ को मजाक में कुबेर का खजाना बता रहे हैं।
यह पूरी जानकारी सूचना के अधिकार यानी आरटीआई एक्ट 2005 के तहत सामने आई है। आरटीआई कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने नागपुर आरटीओ से यह जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में विभाग ने खुद ये आंकड़े जारी किए।
आरटीओ की तरफ से दी गई जानकारी 1 जनवरी 2023 से लेकर 31 जुलाई 2026 तक की अवधि की है। इस दौरान रोड टैक्स से अकेले 25,34,51,72,254 रुपये आए हैं। इसके अलावा 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों पर लगने वाले ग्रीन टैक्स से 214,07,18,924 रुपये वसूले गए। वहीं इम्पोर्टेड यानी विदेशी कारों पर लगने वाले वन टाइम रोड टैक्स से 7,21,65,231 रुपये की कमाई हुई है।
आरटीओ के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में नए और पुराने, दोनों तरह के वाहनों के रजिस्ट्रेशन और री-रजिस्ट्रेशन से रोड टैक्स के तौर पर बहुत बड़ी रकम इकट्ठा हुई है।
विदेशी और लग्जरी गाड़ियां खरीदने वालों ने भी आरटीओ की तिजोरी भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बताई गई अवधि में इम्पोर्टेड कारों और दूसरे वाहनों पर वन टाइम रोड टैक्स के जरिए 27,21,65,231 रुपये का रिकॉर्ड कलेक्शन हुआ। हालांकि 20 साल से ज्यादा पुरानी और अनफिट घोषित की जा चुकी गाड़ियों से अलग से वसूले गए ग्रीन टैक्स या रोड टैक्स का ब्योरा आरटीओ ने नहीं दिया। विभाग का कहना है कि ऐसी गाड़ियों की जानकारी वाहन 4.0 नाम के सेंट्रल कंप्यूटर सिस्टम में अलग से स्टोर नहीं होती, इसलिए इनका अलग आंकड़ा निकालना मुमकिन नहीं है।
ग्रीन टैक्स की बात करें तो यह टैक्स 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन पर लिया जाता है। इसका मकसद पर्यावरण को बचाना और प्रदूषण पर लगाम कसना बताया जाता है।
सरकारी रिकॉर्ड में जब आरटीओ की कमाई 5.55 अरब रुपये के आंकड़े को पार कर रही है, तो सवाल यह उठता है कि इस विभाग में बैठे भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी अपनी जेब में कितना पैसा भर रहे होंगे। शायद इसी वजह से रिटायर हो चुके आरटीओ अफसर भी विभाग से नाता तोड़ना नहीं चाहते। पिछले कुछ महीनों में इस विभाग से जुड़ी जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने पर्दे के पीछे चल रहे खेल को उजागर कर दिया है।
सरकारी खजाने में जमा हो रही इस अरबों की रकम के साथ-साथ ऊपरी कमाई का जो तंत्र चल रहा है, उसने विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इन आंकड़ों से यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब सरकारी बहीखाते में दिखने वाली रकम इतनी है, तो हाथों-हाथ हो रहे लेन-देन की रकम कितनी बड़ी होगी।